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| Gila Shiqwa Shayari |
Today we are for you, as in our life we keep on complaining and complaining. If you also have complaints against anyone, or someone is angry with you. After listening to these poems, you will neither complain nor complain. Gila Shiqwa Shayari |
Gila Shiqwa Shayari
कितना अजीब अपनी जिंदगी का सफर
निकला सारे जहाँ का दर्द अपना मुक़द्दर
निकला जिसके नाम अपनी जिंदगी का हर
लम्हा कर दिया अफ़सोस वो
हमारी चाहत से बेखबर निकला
तक़दीर के लिखे पर कभी
शिक़वा न किया कर ऐ इंसान,
तू इतना अक़्लमंद नहीं
जो भगवान के इरादे समझ सके।
रुलाने के बाद क्यों हँसाते है लोग जाने के
बाद क्यों बुलाते है लोग ज़िंदगी में क्या
कुछ कसर बाकी थी
जो मरने के बाद भी जलाते है लोग
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| Gila shikwa shayari in hindi |
चाहने से कोई चीज अपनी नहीं होती हर
मुस्कराहट ख़ुशी नहीं होती अरमान तो होते हैं
बहुत मगर कभी वक़्त तो कभी किस्मत सही नहीं होती
कोई गिला कोई शिकवा ना रहे आपसे,
ये आरज़ू है कि सिल-सिला रहे आपसे,
बस इस बात की बहुत उम्मीद है आपसे,
खफा ना होना अगर हम खफा रहें आपसे।
वो मुझे चाहती है पर अपना नहीं सकती
मुझे भुलाने का दर्द उठा नहीं सकती अजीब है
उसके प्यार का ये अंदाज भी खफा तो करती है
पर मना नहीं सकती
गिला भी तुझ से बहुत है
मगर मोहब्बत भी वो बात अपनी
जगह है ये बात अपनी
जगह -बासिर सुल्तान काज़मी
Gila Shiqwa Shayari
इस कदर हम यार को मनाने निकले
उसकी चाहत के हम दीवाने निकले जब
भी उसे दिल का हाल बताना चाहा तो
उसके होठो से वक़्त ना होने के बहाने निकले
बराबर से बच कर गुजर जाने वाले ये नाले
नहीं बे-असर जाने वाले नहीं जानते कुछ
की जाना कहाँ है चले जा रहे है मगर जाने वाले
ग़लत है जज़्ब-ए दिल का शिकवा देखो
जुर्म किस का है, न खेंचो गर तुम
अपने को कशाकश दरमियां क्यूं हो !!
हमने मोहब्बतों के नशे में आ कर उसे
खुदा बना डाला होश तब आया जब
उसने कहा की खुदा किसी एक का नहीं होता
गम ये नहीं की कसम अपनी भुलाई तुमने
गम तो ये है की रक़ीबों से निभाई तुमने कोई
रंजिश थी अगर तुमको तो मुझसे कह देते
बात आपस की क्यों सबको बताई तुमने
आसानी से दिल लगाये जाते है
मगर मुश्किल से वादे निभाए जाते है
मोहब्बत ले आती है
उन राहों पे जहाँ दियों के
बदले दिल जलाये जाते है
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| Gila Shiqwa Shayari |
यूँ कहने को तो हम बड़े खुश मिजाज है
लेकिन रुला देती है
अपनों की प्यार की हसरत कभी कभी
हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आये थे
तेरी कसम तुझे अपना बनाने आये थे
किस बात की सजा दी तुमने हमें
बेवफा हम तो तेरे दर्द को अपना बनाने आये थे
किसी फ़क़ीर की झोली में जब मैंने एक
सिक्का डाला तब ये जाना की इस महंगाई
के ज़माने में दुआएं आज भी कितनी सस्ती है
Gila Shiqwa Shayari
ज़माना बदल गया बदल गए इंसान भी
आज बदला सब कुछ चाहत और प्यार भी
आज किसी की नजर में कीमत नहीं है
खून की पैसा जिस की जेब में
वो ही सुल्तान और अमीर भी
मोहब्बत ही में मिलते हैं
शिकायत के मज़े पैहम मोहब्बत
जितनी बढ़ती है शिकायत
होती जाती है -शकील बदायुनी
यहीं से जान गया मैं की वक़्त ढलने लगा मैं
थक हार के बैठा तो फिर जलने लगे जो दे रहा था
सहारा तो एक हजूम में था
जो गिर पड़ा तो सभी रास्ते बदलने लगे
दोस्तों के इस कदर सदमे उठाये जान पर
दिल से दुश्मन की
अदावत का गिला जाता रहा
हाथों की लकीरो पे मत जा ऐ ग़ालिब
नसीब उनके भी होते है
जिनके हाथ नहीं होते
एक से सिलसिले है सब हिज्र की रुत बता गयी
फिर वही सुबह आएगी फिर वही शाम आ
गयी मेरे लहू में जल उठे उतने ही ताज़ा
दम चिराग वक़्त की साजिशी
हवा जितने दिए बुझा गयी
क्यों कोई चाह कर मोहब्बत निभा नहीं
पाता क्यों कोई चाह कर रिश्ता बना नहीं
पाता क्यों लेती है जिंदगी ऐसी करवट
की कोई चाह कर भी प्यार जता नहीं पाता
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| Gila shikwa shayari in hindi |
अपने ही होते है जो दिल पे वार करते है
फ़राज़ वरना गैरो को क्या
खबर की दिल की जगह कौन सी है
Gila Shiqwa Shayari
महफ़िल में मेरे ज़िक्र के आते ही
उठे वो रुस्वा-ऐ-मोहब्बत
का ये एजाज तो देखो
पत्थर समझ कर पांव से ठोकर लगा दी
अफ़सोस तेरी आँख ने परखा नहीं
मुझे क्या उम्मीदे बांध कर आया था
सामने उसने तो आँख भर के देखा नही मुझे
न गिला है कोई हालात से,
न शिकायेतें किसी की जात से…
खुद से सारे लफ्ज जुदा हो रहे हैं
मेरी ज़िन्दगी की किताब से।
पलकें खुली सुबह तो ये जाना हमने मौत
ने आज फिर से हमें जिंदगी
के हवाले कर दिया
एक पल की जुदाई गवारा ना कर सके ऐसा
इश्क हम दुबारा ना कर सके ज़िंदगी
भर पलट के ना देखा कभी हम
फिर भी शिकवा तुम्हारा ना कर सके
Gila Shiqwa Shayari
जख्म देने का अंदाज कुछ ऐसा है
जख्म देकर कहते है अब हाल कैसा है
जहर देकर कहते है अब पीना ही होगा
और जब पी लिया तो कहते है जीना ही होगा यही है
दोस्तों प्यार की कहानी हँसते हँसते फिर रोना ही होगा
वहाँ तक चले चलो
जहाँ तक साथ मुमकिन है,
जहाँ हालात बदलेंगे
वहाँ तुम भी बदल जाना।
रह ना पाओगे कभी भुला कर देख लो यकीन नहीं
आता तो आज़मा कर देख लो हर जगह महसूस होगी
कमी हमारी अपनी महफ़िल को कितना भी सजा कर देख लो
सौ जान से हो जाऊंगा
राजी मैं सजा पर,
पहले वो मुझे अपना
गुनाहगार तो कर ले।
आँखें भी हाय नज़ा में
अपनी बदल गयी सच है
की बेकसी में कोई आश्ना नहीं
दिल तोड़कर हमारा तुमको राहत भी ना मिलेगी
हमारे जैसी तुमको चाहत भी ना मिलेगी यूँ
इतनी बेरुखी ना हमें दिखलाये
हम अगर रूठे तो हमारी आहात भी ना मिलेगी
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| Gila Shiqwa Shayari |
हर एक सवाल का उसको जवाब क्या देते
हम अपनी जात का उसको हिसाब क्या देते
जो एक लफ्ज की खुशबु ना रख सका महफूज
हम उसके हाथ में पूरी किताब क्या देते
Gila Shiqwa Shayari
मिलाते हो उसी को
ख़ाक में जो दिल से मिलता है
मेरी जान चाहने वाला
बड़ी मुश्किल से मिलता है
दिल टूटने पर भी जो शख्स,
शिकायत भी न करे,
उस शख्स की मोहब्बत में
कमियां न निकाला कर।
क्यूँ हिज्र के शिकवे करता है
क्यूँ दर्द के रोने रोता है अब इश्क़
किया तो सब्र भी कर इस में
तो यही कुछ होता है
ठोकर न लगा मुझे पत्थर नहीं हूँ मैं,
हैरत से न देख मुझे मंजर नहीं हूँ मैं,
माना के उनकी नजरो मेरी कदर नहीं,
मगर उनसे पूछो जिन्हें हासिल म नहीं।
किसी के दिल में बसना बुरा तो नहीं किसी को
दिल बसाना खता तो नहीं है ये ज़माने की
नजर में बुरा तो क्या हुआ ज़माने
वाले भी इंसान है खुदा तो नहीं
कुछ पाने की चाहत में बहुत कुछ छूट जाता है
ना जाने सब्र का धागा कहाँ पर टूट जाता है
ज़रा बताओ की तुम किसे हमराह कहते हो
यहाँ तो अपना साया भी साथ छोड़ जाता है
ऐ मौत मैं तुझे गले लगाना चाहता हूँ
कितनी वफ़ा है तुझे मैं ये आज़माना चाहता हूँ
रुलाया है बहुत दुनिया में लोगो ने मुझे मिले
जो साथ तेरा तो मैं दुनिया को रुलाना चाहता हूँ
उन का ग़म उन का तसव्वुर उन के
शिकवे अब कहाँ अब तो ये बातें भी
ऐ दिल हो गईं आई गई -साहिर लुधियानवी
छुरी की नोक से जख्मो पे वो महरम लगते है
जख्म भी खुद ही देते है खुद ही आंसू बहाते है
ये कैसा प्यार है उनका कोई तो
हमको समझाओ सितमगर है
या है दिलबर वो जो याद आते है
Gila Shiqwa Shayari
मोहब्बत से रिहा होना जरुरी हो गया है
मेरा तुझसे जुदा होना जरुरी हो गया है
वफ़ा के तज़ुर्बे करते हुए तो
उम्र गुजरी ज़रा सा बेवफा होना जरुरी हो गया है
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| Gila shikwa shayari in hindi |
करता रहा फरेब कोई सादगी के साथ इतना
बड़ा मजाक मेरी जिंदगी के साथ शायद
मिली सजा मुझे इस जुर्म की हो गया था
जो प्यार मुझे एक अजनबी के साथ
भुलाकर मुझे अगर तुम अब भी हो सलामत तो
भुलाकर तुम्हे सम्भालना मुझे भी आता है
मेरी फितरत में नहीं है ये आदत वरना
तेरी तरह यूँ बदलना मुझे भी आता है
कैसे कहे की उसको भी हमसे है
कोई वास्ता उसने तो हमसे
आज तक कोई गिला नहीं किया
होता है जिस जगह मेरी
बरबादियों का जिक्र,
तेरा भी नाम लेती है
दुनिया कभी कभी।
हमारे सब्र का इम्तेहान न लीजिये,
हमारे दिल को यूँ सजा न दीजिये,
जो आपके बिना जी न सके एक पल,
उन्हें और जीने कि दुआ न दीजिये।
कोई ताबीज़ ऐसा दो
के मैं चालक हो जाऊं,
बहुत नुक्सान देती है
मुझे ये सादगी मेरी।
दिल को पिघलाता हुआ
आँखों क गरमाता हुआ
फिर ख्याल -ऐ-यार आया
आगा बरसाता हुआ
Gila Shiqwa Shayari
उसकी चाहत ने रुलाया बहुत है उसकी यादो
ने तड़पाया बहुत है हम उससे करते है
मोहब्बत बेइन्तहा इस बात को
उसने आज़माया बहुत है
काश वो समझते है इस दिल की तड़प को तो यूँ
हमें रुस्वा ना किया होता उनकी ये बेरुखी
भी मंजूर थी हमें बस एक बार हमें समझ लिया होता
बदली जो कयानात मुझे इसका गम नहीं
लेकिन बुरा था नसीब जो तुम बदल गए
मुझे सता के वो मेरी दुआएं लेता है,
उसे खबर है के मुझे बदुआ नहीं आती,
सब कुछ सौंप दिया उसे हमने अपना,
फिर भी वो कहता है हमें वफ़ा नहीं आती।
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| Gila Shiqwa Shayari |
कोई गिला कोई शिकवा ना रहे आपसे ये
आरजू है की सिलसिला रहे आपसे
बस इस बात की बड़ी उम्मीद है
आपसे खफा ना होना अगर हम खफा रहे आपसे
ज़िंदगी से यही गिला है
मुझे तू बहुत देर से मिला है मुझे
कोई मिल जाये मुझे तुम
जैसा ये ना -मुमकिन सही
लेकिन तुम ढूंढ लो हम
जैसा इतना आसान ये भी नहीं
कहने देती नहीं कुछ मुँह से मोहब्बत
मेरी लब पे रह जाती है
आ आ के शिकायत मेरी
-दाग़ देहलवी
आतिश -ऐ-इश्क में जल जाऊँ तुझे इससे क्या
मौसम की तरह बदल जाऊँ तुझे इससे क्या
चोट कौन या जख्म लगे ये एहसास-ऐ-गम
में तर्पण मैं गिर जाऊँ या संभल जाऊँ तुझे इससे क्या
Gila Shiqwa Shayari
क्या जानिए क्या है तेरे बीमार की
हालत इसे भी कहते है
की है वक़्त दुआ का
मैं भी मुहं में जुबान रखता हूँ
काश पूछो की मुद्दा क्या है
जब की तुझ बिन नहीं कोई
मौजूद फिर ये हंगामा ऐ खुदा क्या है
दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता,
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता,
बरबाद हो गए हम उनके प्यार में,
और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता।
लुफ्त वो इश्क में पाये है की जी जानता है
रंज भी ऐसे उठाये है की जी जानता है
जो ज़माने के सितम है वो जमाना जाने
तूने दिल इतने सताए है की जी जानता है
चुप रहो तो पूछता है ख़ैर है
लो ख़मोशी भी शिकायत हो
गई -अख़्तर अंसारी अकबराबादी
अपने मेहबूब की खातिर था खुदा को
मंजूर वरना क़ुरान भी
उतरता बे जुबान -ऐ-उर्दू
प्यार किसी से जो करोगे रुस्वाई ही मिलेगी
वफ़ा कर लो चाहे जितनी बेवफाई ही मिलेगी
जितना भी किसी को अपना बना लो
जब आँख खुलेगी तन्हाई ही मिलेगी
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| Gila Shiqwa Shayari |
Gila Shiqwa Shayari
शिक़वा वो भी करते हैं
शिकायत हम भी करते हैं,
मुहोब्बत वो भी करते हैं
मुहोब्बत हम भी करते हैं।
कुछ मैं भी थक गया उसे ढूंढते हुए कुछ
जिंदगी के पास भी मोहलत नहीं रही
उसकी हर एक अदा से झलकने लगा
खलूस जब मुझको ऐतबार की आदत नहीं रही
हुस्न भी था कशिश भी थी अंदाज भी था
क़ाब भी था हया भी था प्यार भी था
अगर कुछ ना था तो बस इकरार
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जायेगा मगर
तुम्हारी तरह कौन मुझे चाहेगा तुम्हें
जरूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहा से लाएगा
उन्ही रास्तों ने जिन पे
कभी तुम साथ थे मेरे,
मुझे रोक रोक पूछा
तेरा हमसफ़र कहाँ है।
शिकवा तो बहुत है
मगर शिकायत नहीं कर सकते,
मेरे होठों को इजाजत
नहीं तेरे खिलाफ बोलने की।
हैरान हूँ की मुद्दत -ऐ-क़ातील मैं
मोहसिन वो शख्स मेरी
सोच से ज्यादा बदल गया
सब फ़साने है दुनिया दारी के किस ने
किस का सुकून लूटा है सच तो ये है
की इस ज़माने में मैं भी झूठा हूँ तू भी झूठा है
Gila Shiqwa Shayari
बड़ा मज़ा हो जो महशर में हम करें
शिकवा वो मिन्नतों से कहें
चुप रहो ख़ुदा के लिए
तू दोस्त किसी का भी सितमगर ना हुआ था
औरों पे है वो जुल्म की मुझ पर ना हुआ था
छोड़ा मेह -ऐ -नख्शब की तरह
दास्त-ऐ-क़ज़ा ने खुर्शीद हनूज़
उस के बराबर ना हुआ था
तकदीर ने जैसे चाहा वैसे ढल गए हम,
बहुत सभल कर चले फिर भी फिसल गए हम,
किसी ने यकीन तोड़ा तो किसी ने हमारा दिल,
और लोगों को लगता है बदल गए हम।
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| Gila shikwa shayari in hindi |
ग़ुम ऐ आरजू तेरी राह में शब ऐ
आरजू तेरी चाह में जो उजड़ गया वो
बसा नहीं जो बिछड़ गया वो मिला नहीं
बात उम्र भर की थी दो पल की नहीं बात साथ
की थी हालात की नहीं जहाँ के मेले में
हाथ छोड़ दिया तूने बात
जुबान की थी किस्मत की नहीं
वफ़ा के बदले मुझे बेवफाई न किया कर,
मेरी उम्मीद ठुकरा कर इंकार न किया कर,
तेरी मोहब्बत में हम सब कुछ गवा बैठे,
जान चली जाएगी यूँ इम्तिहान न लिया कर।
मुमकिन हो आपसे तो भुला दीजिये मुझे
पत्थर पे हूँ लकीर मिटा दीजिये मुझे
हर रोज मुझसे ताजा शिकायत है
आप को मैं क्या हूँ एक बार बता दीजिये मुझे
तक़दीर से शिकवा भी करे तो
किस तरह करे इस तक़दीर
ने हमको मिलाया भी था उनसे
करोगे याद एक दिन इस प्यार के ज़माने को
चले जायेंगे जब हम कभी ना वापस आने
को चलेगा महफ़िल में जब जिक्र हमारा
कोई तो तुम भी तन्हाई ढूँढोगे आंसू बहाने को
Gila Shiqwa Shayari
शोर है हंगामा अराई है जिंदगी तू कहाँ ले
आई है नफ्सा नफ्सी का
अजीब आलम है भीड़ है मगर तन्हाई है
दीवाना मत कहो मुझको यूँ अच्छा नहीं लगता बड़ा
अफ़सोस होता है जब कोई अपना नहीं लगता लगता है
की होगी उसकी भी कुछ मजबूरी
उसका यूँ छोड़ कर जाना अच्छा नहीं लगता
तू अगर छोड़ के जाने की जिद पे है
तो जा जान भी जिस्म से जाती है
तो कब पूछ के जाती है
ये ना पूछ की शिकायतें कितनी है तुझसे ऐ
जिंदगी सिर्फ ये बता की तेरा
कोई और सितम बाकि तो नहीं है
बदलते इस ज़माने ने सबको बदल डाला
ख्वाबों और ख्यालो को भी बदल डाला ना
बदल सका उस बेवफा को प्यार मेरा
जिसके लिए हमने अपने आपको बदल डाला
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| Gila Shiqwa Shayari |
करोगे याद तुम की मैं कहता था कभी
दौलत और मोहब्बत का ना कभी भी मेल होता है
होती है जिनके लिए दौलत ही सब से
बढ़कर उनके लिए तो ये मोहब्बत बस एक खेल होता है
नहीं जाता किसी से वो मर्ज़ जो है
नसीबों का ना क़ायल हूँ
दवा का मैं ना कायल हूँ
तबीबों का ना शिकवा दुश्मनो का है
ना है शिकवा हबीबों का शिकायत है
तो किस्मत की गिला है तो नसीबों का
दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बैठे,
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बैठे,
वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का,
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बैठे..!!
ज़िंदगी से चले हैं अब इल्ज़ाम लेकर,
बहुत जी चुके हैं अब उनका नाम लेकर,
अकेले बातें करेंगे अब वो इन सितारों से,
अब चले जायेंगे उन्हें यह सारा आसमान देकर..!!
Gila Shiqwa Shayari
फलक से चाँद उतारा गया,
मेरी आस का एक सहारा गया,
मैं दो बूँद पानी तरसती रही ,
मेरे होंठों से ज़हर गुज़ारा गया..!!
भूल गए या, भुलाना चाहते हो ,
दूर कर दिया, या जाना चाहते हो ,
आजमा लिया, या आजमाना चाहते हो ,
मैसेज कर रहे हो या अभी और पैसे बचाना चाहते हो..!!
मोहब्बत नहीं है कोई किताबों की बाते,
समझोगे जब रो कर कुछ काटोगे रातें,
जो चोरी हो गया तो पता चला दिल था हमारा,
करते थे हम भी कभी किताबों की बाते..!!
दर्द ही सही मेरे इश्क़ का इनाम तो आया,
खाली ही सही होठों तक जाम तो आया,
मैं हूँ बेवफा सबको बताया उसने,
यूँ ही सही चलो उसके लबों पर मेरा नाम तो आया..!!
जब प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते,
ख़त किस लिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते,
किस वास्ते लिखा है हथेली पे मेरा नाम,
मैं हर्फ़ ग़लत हूँ तो मिटा क्यों नहीं देते..!!
इस कदर हम यार को मनाने निकले,
उसकी चाहत के हम दिवाने निकले,
जब भी उसे दिल का हाल बताना चाहा ,
उसके होठों से वक़्त न होने के बहाने निकले..!!
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| Gila shikwa shayari in hindi |
हमें उनसे कोई शिकायत नहीं,
शायद हमारी किस्मत में चाहत नहीं,
मेरी तकदीर को लिखकर तो,
ऊपर वाला भी मुकर गया,
पूछा तो कहा, "ये मेरी लिखावट नहीं..!!
इन आंखो मे आंसू आये न होते,
अगर वो पीछे मुडकर मुस्कुराये न होते,
उनके जाने के बाद बस येही गम रहेगा,
कि काश वो हमारी ज़िन्दगी मे दूबारा आये न होते..!!
भुला के मुझको अगर तुम भी हो सलामत,
तो भुला के तुझको संभलना मुझे भी आता है,
नहीं है मेरी फितरत में ये आदत वरना,
तेरी तरह बदलना मुझे भी आता है..!!
Gila Shiqwa Shayari
दुनिया ने हम पे जब कोई इल्ज़ाम रख दिया,
हमने मुक़ाबिल उसके तेरा नाम रख दिया,
इक ख़ास हद पे आ गई जब तेरी बेरुख़ी,
नाम उसका हमने गर्दिशे-अय्याम रख दिया..!!
एक सिलसिले की उम्मीद थी जिनसे,
वही फ़ासले बनाते गये,
हम तो पास आने की कोशिश में थे,
ना जाने क्यूँ वो हमसे दूरियाँ बढ़ाते गये ..!!
कदम कदम पे बहारों ने साथ छोड़ दिया,
पड़ा जब वक़्त तब अपनों ने साथ छोड़ दिया,
खायी थी कसम इन सितारों ने साथ देने की,
सुबह होते देखा तो इन सितारों ने साथ छोड़ दिया..!!
ज़ख़्म देने की आदत नहीं हमको,
हम तो आज भी वो एहसास रखते हैं,
बदले बदले से तो आप हैं जनाब,
जो हमारे अलावा सबको याद रखते हैं..!!
दीवाने तेरे हैं, इस बात से इनकार नहीं,
कैसे कहें कि हमें आपसे प्यार नहीं,
कुछ तो कसूर है आपकी निगाहों का,
हम अकेले तो गुनेहगार नहीं..!!
ज़िंदगी हमारी यूँ सितम हो गयी,
ख़ुशी ना जाने कहाँ दफ़न हो गयी,
बहुत लिखी खुदा ने लोगों की मोहब्बत,
जब आयी हमारी बारी तो स्याही ही ख़त्म हो गयी..!!
दस्तूर-ए-उल्फ़त वो निभाते नहीं हैं,
जनाब महफ़िल में आते ही नहीं हैं,
हम सजाते हैं महफ़िल हर शाम,
एक वो हैं जो कभी तशरीफ़ लाते ही नहीं हैं..!!
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| Gila Shiqwa Shayari |
समझा न कोई हमारे दिल की बात को,
दर्द दुनिया ने बिना सोचे ही दे दिया,
जो सह गए हर दर्द को हम चुपके से,
तो हमको ही पत्थर दिल कह दिया..!!
अपनी तकदीर में तो कुछ ऐसे ही सिलसिले लिखे हैं,
किसी ने वक़्त गुजारने के लिए अपना बनाया,
तो किसी ने अपना बनाकर 'वक़्त' गुजार लिया..!!
एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यों है,
इंकार करने पर चाहत का इकरार क्यों है ,
उसे पाना नहीं मेरी तकदीर में शायद ,
फिर भी हर मोड़ पर उसी का इन्तज़ार क्यों है ..!!
Gila Shiqwa Shayari
उनकी निगाहें कुछ ऐसे शरारत करतीं हैं,
जुल्फे भी हाय कयामत करती हैं,
हम चाहकर भी उनसे नजरे हटा नहीं पते,
फिर भी शिकायत वो मेरी नज़रों से करतीं है…
वो भूल गए कि उन्हें हसाया किसने था,
जब वो रूठे थे तो मनाया किसने था,
वो कहते हैं वो बहुत अच्छे है शायद,
वो भूल गए कि उन्हें यह बताया किसने था..!!
मुझे सता के वो मेरी दुआएं लेता है,
उसे खबर है कि मुझे बद्दुआ नहीं आती,
सब कुछ सौप दिया उसे हमने,
फिर भी वो कहता है, हमें वफा नहीं आती..!!
दिल से दूर जिन्हें हम कर ना सके,
पास भी उन्हें हम कभी पा ना सके,
मिटा दिया प्यार जिसने हमारे दिल से,
हम उनका नाम लिख कर भी मिटा ना सके…
कब वो सुनता है कहानी मेरी
और फिर वो भी ज़बानी मेरी
मिर्ज़ा ग़ालिब
आग से सीख लिया हम ने यह करीना भी,
बुझ भी जाना पर बड़ी देर तक सुलगते रहना,
जाने किस उम्र में जाएगी यह आदत अपनी,
रूठना उससे और औरों से उलझते रहना..!!
मोहब्बत का मेरा यह सफर आख़िरी है,
ये कागज, ये कलम, ये गजल आख़िरी है,
फिर ना मिलेंगे अब तुमसे हम कभी,
क्योंकि तेरे दर्द का अब ये सितम आख़िरी है
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| Gila shikwa shayari in hindi |
तुम ने चाहा ही नहीं हालात बदल सकते थे,
तेरे आाँसू मेरी आँखों से निकल सकते थे,
तुम तो ठहरे रहे झील के पानी की तरह,
दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे..!!
Gila Shiqwa Shayari
ग़ैरों से कहा तुम ने ग़ैरों से सुना तुम ने
कुछ हम से कहा होता कुछ हम से सुना होता
चराग़ हसन हसरत
मेरा इल्ज़ाम है तुझ पर कि तू बेवफा था,
दोष तो तेरा था मगर तू हमेशा ही खफा था,
ज़िन्दगी की इस किताब में बयान है तेरी मेरी कहानी,
यादों से सराबोर उसका एक एक सफा था..!!
मानते हैं सारा जहाँ तेरे साथ होगा,
खुशी का हर लम्हा तेरे पास होगा,
जिस दिन टूट जाएँगी साँसे हमारी,
उस दिन तुझे हमारी कमी का एहसास होगा..!!
तरसते थे जो मिलने को हमसे कभी,
आज वो क्यों मेरे साए से कतराते हैं,
हम भी वही हैं दिल भी वही है,
न जाने क्यों लोग बदल जाते हैं..!!
ज़िंदगी से यही गिला है मुझे
तू बहुत देर से मिला है मुझे
अहमद फ़राज़
कहाँ से लाऊँ हुनर उसे मनाने का,
कोई जवाब नहीं था उसके रूठ जाने का,
मोहब्बत में सजा मुझे ही मिलनी थी,
क्योंकि जुर्म मेरा था उनसे दिल लगाने का..!!
ना जाने कौन सी बात पर वो रूठ गयी है,
मेरी सहने की हदें भी अब टूट गयी हैं,
कहती थी जो कि कभी नहीं रूठेगी मुझसे,
आज वो अपनी ही बातें भूल गयी है..!!
रास्ते में पत्थरों की कमी नहीं है,
मन में टूटे सपनो की कमी नहीं है,
चाहत है उनको अपना बनाने की मगर,
उनके पास अपनों की कमी नहीं है..!!
सब फ़साने हैं दुनियादारी के,
किस से किस का सुकून लूटा है,
सच तो ये है कि इस ज़माने में,
मैं भी झूठा हूँ तू भी झूठा है..!!
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| Gila Shiqwa Shayari |
नज़र चाहती है दीदार करना,
दिल चाहता है प्यार करना,
क्या बतायें इस दिल का आलम,
नसीब में लिखा है इंतजार करना..!!
Gila Shiqwa Shayari
मुद्दत से कोई शख्स रुलाने नहीं आया,
जलती हुई आँखों को बुझाने नहीं आया,
जो कहता था कि रहेंगे उम्र भर साथ तेरे,
अब रूठे हैं तो कोई मनाने नहीं आया..!!
उन्हें एहसास हुआ है इश्क़ का हमें रुलाने के बाद,
अब हम पर प्यार आया है दूर चले जाने के बाद,
क्या बताएं किस कदर बेवफ़ा है यह दुनिया,
यहाँ लोग भूल जाते ही किसी को दफनाने के बाद..!!
खुदा जाने, प्यार का दस्तूर क्या होता है
जिन्हें अपना बनाया, वो न जाने क्यों दूर होता है
कहते हैं कि मिलते नहीं ज़मीन आसमान
फिर न जाने क्यूँ, आसमान ज़मीन का सरूर होता है..!!
गर्मिये हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं,
हम चिरागों की तरह शाम से जल जाते हैं,
शमा जलती है जिस आग में नुमाइश के लिए,
हम उसी आग में गुमनाम से जल जाते हैं,
जब भी आता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ,
जाने क्यों लोग मेरे नाम से जल जाते हैं..!!
वक़्त बदलता है ज़िन्दगी के साथ,
ज़िन्दगी बदलती है वक़्त के साथ,
वक़्त नहीं बदलता अपनों के साथ,
बस अपने बदल जाते हैं वक़्त के साथ..!!
तकदीर बनाने वाले, तूने भी हद कर दी,
तकदीर में किसी और का नाम लिखा था,
और दिल में चाहत किसी और की भर दी..!!
Gila Shiqwa Shayari
हमने सोचा कि सिर्फ हम ही उन्हें चाहते हैं,
मगर उनके चाहने वालों का तो काफ़िला निकला,
मैंने सोचा कि शिकायत करू खुदा से,
मगर वह भी उनके चाहने वालों में निकला..!!
ज़िंदा रहे तो क्या है, जो मर जायें हम तो क्या,
दुनिया से ख़ामोशी से गुज़र जायें हम तो क्या,
हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने,
एक ख्वाब हैं जहान में बिखर जायें हम तो क्या..!!
कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था,
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था,
सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है,
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था..!!
वादा करके वो निभाना भूल जाते हैं,
लगा कर आग फिर वो बुझाना भूल जाते हैं,
ऐसी आदत हो गयी है अब तो उस हरजाई की,
रुलाते तो हैं मगर मनाना भूल जाते हैं..!!
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| Gila Shiqwa Shayari |
किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह,
वो आशना भी मिला हमसे अजनबी की तरह,
किसे ख़बर थी बढ़ेगी कुछ और तारीकी,
छुपेगा वो किसी बदली में चाँदनी की तरह..!!
वादा करके निभाना भूल जाते हैं,
लगा कर आग फिर वो बुझाना भूल जाते हैं,
ऐसी आदत हो गयी है अब तो सनम की,
रुलाते तो हैं मगर मनाना भूल जाते हैं..!!
उल्फत में अक्सर ऐसा होता है ,
आँखे हंसती हैं और दिल रोता है,
मानते हो तुम जिसे मंजिल अपनी,
हमसफर उनका कोई और होता
जुदा हुए है बहुत लोग इक तुम भी
सही अब इतनी सी बात
पे क्या जिंदगी हराम करे
बदलते इस ज़माने ने सब को बदल डाला ख्वाबों
और ख्यालों को भी बदल डाला ना बदल सका
उस बेवफा को प्यार मेरा जिसके
लिए हमने अपने आप को बदल डाला
Gila Shiqwa Shayari
उसके बिन चुप चुप रहना अब अच्छा लगता है
ख़ामोशी से एक दर्द को सहना भी अच्छा लगता है
उसका मिलना ना मिलना तो किस्मत की बात है
मगर पल पल उसकी याद में रोना अब अच्छा लगता है
हमसे खेलती रही दुनिया ताश की पत्तो की
तरह जिसने जीता उसने भी फेंका
जिसने हारा उसने भी फेंका
कुछ आंसू कुछ खुशिया देकर टाल गया
जीवन का एक और सुनहरा साल गया कौन
जाने की कल का समा कैसा होगा
अब तक तो कल सा ही है सब हाल गया
रेत पर थक गिरा हूँ तो हवा पूछती है
आप इस दश्त में क्यों आये थे
वहशत के बगैर
दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम
नहीं करते -जौन एलिया
खामोश गुजर जाते है वो करीब से सवाल उठते है
दिल में अजीब से वो खफा है
या ये उनकी कोई अदा है
शिकायत भी क्या करे अब अगर यही है नसीब में
जाने दो अब इस गुस्से को
इश्क को तो भी निभाना है
गुस्सा है अगर आशिक़ पे
तो कब्र में क्यों इससे लजाना है
हर चमन में मुमकिन है की गुल खिल जाये
तुम्हे भी हमारे बाद मुमकिन है कोई और
मिल जाये जिंदगी तो तुमने कभी हमको जीने
ना दी अब मरना चाहा तो कहते हो
की मौत भी ना आये
मत पूछ शीशे से
उसके टूटने कि वजह,
उसने भी किसी
पत्थर को अपना समझा होगा।
Gila Shiqwa Shayari
रैज़ा रैज़ा है अक्स मेरा मगर हैरत ये है,
है मेरा आइना
सलामत तो फिर टूटा क्या है
मेरे लफ्ज़ अगर उस तक पहुंच जाये तो बस
इतना कह देना हम जैसे लोग
एक बार खो जाएं तो फिर दोबारा नहीं मिलते
ये तरक़्क़ी का ज़माना है
तेरे आशिक पर उँगलियाँ
उठती थी अब हाथ उठा करते है
कहेगा झूट वो हमसे
तुम्हारी याद आती है,
कोई है मुन्तजिर कितना
ये लहेजे बोल देते हैं।
हम क्यूँ,शिकवा करें झूठा,क्या हुआ
जो दिल टूटा शीशे का खिलौना था,
कुछ ना कुछ तो होना था, .
कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है
वास्ता कोई तू ने तो हम से आज
तक कोई गिला नहीं किया
-जौन एलिया
मजा देती है उनको जिंदगी की
ठोकरें मोहसिन जिनको नाम -ऐ-खुदा
लेकर संभल जाने की आदत हो
Gila Shiqwa Shayari
शिकवा तो एक छेड़ है लेकिन
हकीकतन तेरा सितम भी
तेरी इनायत से कम नहीं।
बदला जो वक़्त गहरी दोस्ती बदल गयी सूरज ढला
तो साये की सूरत बदल गयी एक उम्र तक
मैं तेरी जरूरत बना रहा फिर यूँ
हुआ की तेरी जरुरत बदल गयी
तरसते थे जो हमसे मिलने को कभी ना जाने
क्यों आज हमारे साये से भी कतराते है
हम भी वही है ये दिल भी वही है
ना जाने फिर क्यों ऐसे लोग बदल जाते है
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जितनी शिद्दत से मुझे जख्म दिया है
उसने इतनी शिद्दत से
तो मैंने उसे चाहा भी ना था
चमन से बिछड़ा हुआ एक गुलाब हूँ
मैं खुद अपनी तबाई का जबाब हूँ
यूँ निगाहे ना फेर मुझसे मेरे
सनम मैं तेरी चाहतों में ही हुआ बर्बाद हूँ
तुम पर बीतेगी तो तुम भी जान
जाओगे मोहसिन कोई नजर
अंदाज करे तो कितना दर्द होता है
हमारे इश्क़ में रुस्वा हुए तुम मगर
हम तो तमाशा हो गए हैं
-अतहर नफ़ीस
ये मत कहना के तेरी याद से रिस्ता नहीं रखा,
मैं खुद तन्हा रहा मगर दिल को तन्हा नहीं रखा,
तुम्हारी चाहतो के फूल तो महफूज रहे हैं,
तुम्हारी नफरतों कि पीर को जिंदा नहीं रखा।
दुनिया न जीत पाओ तो हारो न
खुद को तुम थोड़ी बहुत तो
ज़हन मे नाराज़गी रहे !!
-निदा फ़ाजली
Gila Shiqwa Shayari
हर ग़ालिब ग़ालिब जिसको समझते है
हम शुहूद है ख्वाब में
हनूज़ जो जागे है ख्वाब में
मोहब्बत की दास्ताँ सुनाने आये है
तबाह करने के बाद वो प्यार जताने आये है
आंसू पूछ लिए थे हमने कब के
मगर वो फिर से आज हमें रुलाने आये है
कहाँ तलाश करोगे तुम मुझ जैसा कोई
जो तुम्हारे सितम भी सहे
और तुम से मोहब्बत भी करे
दीदार तेरा किया हमने आज गैरो की
क़तार से ना नजर-ऐ-इनायत
हुई ना रूह को सुकून मिला
बेवफाई करके निकलू या वफ़ा कर जाऊंगा शहर
को हर ज़ायके से आश्ना कर जाऊंगा तू भी
ढूंढेगा मुझे शौक- ऐ -सजा में एक दिन मैं
भी कोई खूबसूरत सी खता कर जाऊंगा
गिले है हजारों की बदले हो क्यों तुम मगर अब
करे क्यों गिला अजनबी से अजब है
नींदें गंवाने का सिलसिला ये
अच्छा नहीं सिलसिला अजनबी से
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| Gila shikwa shayari in hindi |
जिनको तूफ़ान से उलझने की आदत
हो मोहसिन ऐसी कश्ती
को समंदर भी दुआ देते है
मोहब्बत हमने की तो एक खता हो गयी की
वफ़ा और जिंदगी ही अब सजा हो
गयी वफ़ा करते रहे इबादतों की
तरह फिर इबादत भी हमारे लिए एक गुनाह हो गयी
आरज़ू हसरत और उम्मीद शिकायत
आँसू इक तिरा ज़िक्र था और
बीच में क्या क्या निकला -सरवर आलम राज़
Gila Shiqwa Shayari
मौत से कह दो की हमसे नाराजगी ख़त्म
कर ले अब वो भी बहुत बदल गए है
जिनके लिए जिया करते थे हम
मोहब्बत यहाँ बिकती है इश्क नीलाम होता है
भरोसे का क़त्ल यहाँ खुले आम होता है
ज़माने से जब मिली ठोकर तो मैखाने चले गए
हम आज वही ज़माना हमें शराबी का नाम देता है
हो ना हो ये कोई सच बोलने वाला है
कातील जिसके हाथों में
क़लम पावों में ज़ंजीरें है
जाने किस बात की
उनको शिकायत है मुझसे,
नाम तक जिनका नहीं मेरे अफ़साने में।
तू होश में थी फिर भी
हमें पहचान न पायी,
एक हम हैं के पीकर भी
तेरा नाम लेते रहे।
मोहब्बत है की नफरत है कोई इतना
तो समझाए कभी मैं दिल से लड़ती हूँ
कभी दिल मुझसे लड़ता है
गुजर गया वो वक़्त जब तेरी हसरत थी
मुझे अब तू खुदा भी बन जाये
तो भी तेरा सजदा ना करूँ
ये क्या की तुझे भी है ज़माने से
शिकायत ये क्या की तेरी
आँख भी पुरनुम है मेरी जान
तेरे बाद हमने इस दिल का
दरवाजा खोला ही नहीं,
वरना बहुत से चाँद आये
तेरे घर को सजाने के लिए।
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| Gila Shiqwa Shayari |
तिनको से खेलते ही रहे आशियाँ में
हम आया भी और गया भी
ज़माना बहार का
उनका भरोसा मत करो जिनका ख्याल वक़्त
के साथ बदल जाये भरोसा उनका करो
जिनका ख्याल वैसे ही रहे
जब आपका वक़्त बदल जाये
Gila Shiqwa Shayari
मैं अपनी चाहतों का हिसाब
जो लेने बैठ जाऊं,
तो तुम मेरा सिर्फ याद करना भी
न लौटा सकोगे।
कोई गिला कोई शिकवा न रहे आप से,
ये आरज़ू है इक सिल सिला बना रहे आप से,
बस इक बात की उम्मीद है आप से,
दिल से दूर न करना अगर दूर भी रहें आप
कहते है वो मजबूर है हम ना चाहते हुए भी दूर है
हम चुरा ली है उन्होंने धड़कने
हमारी फिर भी कहते है बेक़सूर है हम
मेरे पास इतने सवाल थे
मेरी उम्र से ना सिमट
सके तेरे पास जितने जवाब थे
तेरी एक निगाह में आ गए
जब गिला शिकवा अपनों से
हो तो खामोशी ही भली,
अब हर बात पे जंग हो
यह जरूरी तो नहीं।
हम को पहले भी न मिलने की
शिकायत कब थी अब जो है
तर्क-ए-मरासिम का बहाना हम से
जिसने कभी चाहतो का पैगाम लिखा था
जिसने सब कुछ मेरे नाम लिखा था सुना है
आज उसे मेरे ज़िक्र से भी नफरत है
जिसने कभी अपने दिल पर मेरा नाम लिखा था
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| Gila shikwa shayari in hindi |
जिसे खुद से ही नहीं फुर्सतें जिसे ख्याल
अपने कमाल का उसे क्या
खबर मेरे शौंक की,उसे क्या पता मेरे हाल का
Gila Shiqwa Shayari
मौत से कह दो की हम से नाराजगी
खत्म कर ले अब वो भी बहुत बदल गए है
जिनके लिए जिया करते थे हम
हो जाते हो बरहम भी बन जाते हो हमदम भी
ऐ साकी-ए-मयखाना शोला भी हो,
शबनम भी खाली मेरा पैमाना बस
इतनी शिकायत है
क़सम देकर अपनी तुझे रोक लेगा तेरी
लघज़िशों पे तुझे टोक देगा तू मुड़ मुड़
के पीछे किसे देखता है
तेरा कौन है जो तुझे रोक लेगा
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| Gila Shiqwa Shayari |
ग़ैरों से कहा तुम ने ग़ैरों से सुना तुम
ने कुछ हम से कहा होता कुछ
हम से सुना होता -चराग़ हसन हसरत
ख्वाहिशों का काफिला भी अजीब ही है
अक्सर वहीँ से गुजरता है जहाँ रास्ता ना हो
कोई मिला ही नहीं
जिसको सौपते मोशिन,
हम अपने ख्वाब की खुशबू,
ख्याल का मौसम।
Gila Shiqwa Shayari
शाम -ऐ -वादा सही दुःख ज्यादा ही सही
फिर भी देखो फ़राज़ आज शब
उसकी फ़ुर्क़त में कह लो गजल कल उसे देखना
कभी पत्थर से भी टकराये तो खराश तक ना
आये कभी इक बात ही से
इंसान टूट के बिखर जाते है



















