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| Garibi Shayari |
Friends are here as always with another new post for you, friends, although we have uploaded a lot of Hindi poetry on this website, but in this post we will write Hindi poetry on poverty, in my eyes the poor is not the one who has money They don't happen, in my view the poor is the one who doesn't have good people.
In this post, I have tried to give you some such wonderful and wonderful Garibi Shayari, Shayari Garibi Par, which you too will say wow after listening. Friends, this world is very cruel, it knows the good and bad of a person only by the amount of money he has. That's why I would request all of you my brothers to make yourself so capable that people would point fingers in their teeth after seeing your success.
Garibi Shayari
क्या किस्मत पाई है रोटीयो ने भी निवाला बनकर
रहिसो ने आधी फेंक दी,
गरीब ने आधी में जिंदगी गुज़ार दी
खिलौना समझ कर खेलते जो रिश्तों से
उनके निजी जज्बात ना पूछो तो अच्छा है
बाढ़ के पानी में बह गए छप्पर जिनके
कैसे गुजारी रात ना पूछो तो अच्छा है
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| Shayari Garibi Par |
मैं कई चूल्हे की आग से भूखा उठा हूँ,
ऐ रोटी अपना पता बता,
तू जहाँ बर्बाद होती हैं।
अजीब सा जादुई नशा होता है
गरीब की कमाई में,
जिसकी रोटी खाकर पथरीले रास्तों
पर भी सुकून की नींद आ जाती है।
Garibi Shayari
रजाई की रूत गरीबी के आँगन दस्तक देती है,
जेब गर्म रखने वाले ठंड से नही मरते।
रोज़ शाम मैदान में बैठ ये
कहतें हुए एक बच्चा रोता है,
हम गरीब है इसलिए हम गरीब
का कोई दोस्त नही होता है।
ना जाने मेरा मज़हब क्या है ।
ना हिंदू हु ना मुसलमान
लोग मुझे गरीब कहते हैं
गरीबों की औकात ना पूछो तो अच्छा है
इनकी कोई जात ना पूछो तो अच्छा है
चेहरे कई बेनकाब हो जायेंगे
ऐसी कोई बात ना पूछो तो अच्छा
कभी कपड़े के
तन पर अजीब लगती हैं।
अमीर बाप की बेटी गरीब लगती हैं।
ठहर जाओ भीड़ बहुत है,
तुम गरीब हो
कुचल दिए जाओगे।
जब भी देखता हूँ किसी
गरीब को हँसते हुए,
यकीनन खुशिओं का ताल्लुक
दौलत से नहीं होता
बात मरने की भी हो
तो कोई तौर नहीं देखता,
गरीब, गरीबी के
सिवा कोई दौर नहीं देखता।
Garibi Shayari
किस्मत को खराब बोलने वालो ।
कभी किसी गरीब के पास
बैठ के पुछना जिंदगी क्या हैं।
वो राम की खिचड़ी भी खाता है,
रहीम की खीर भी खाता है
वो भूखा है जनाब उसे
कहाँ मजहब समझ आता है
यूँ गरीब कह कर खुद
की तौहीन ना कर ऐ बंदे।
गरीब तो वो लोग हैं
जिनके पास ईमान नहीं है।
हम गरीब लोग है किसी को
मोहब्बत के सिवा क्या देंगे
एक मुस्कराहट थी,
वह भी बेवफ़ा लोगो ने छीन ली
ड़ोली चाहे अमीर के
घर से उठे चाहे गरीब के
चौखट एक बाप की ही सूनी होती है
भूख ने निचोड़ कर रख दिया है जिन्हें
उनके तो हालात ना पूछो तो अच्छा है
मज़बूरी में जिनकी लाज लगी दांव पर
क्या लाई सौगात ना पूछो तो अच्छा है
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| Shayari Garibi Par |
Garibi Shayari
अमीर के छत पे बैठा
कव्वा भी मोर लगता हैं।
गरीब का भुखा
बच्चा भी चोर लगता हैं।
गरीबी की भी क्या खूब
हँसी उड़ायी जाती है,
एक रोटी देकर 100 तस्वीर
खिंचवाई जाती है।
मेरे हिस्से की रोटी
सीधा मुझे दे दे ऐ खुदा,
तेरे बंदे तो बड़ा ज़लील करके देते हैं।
बस एक बात का मतलब
आज तक समझ नहीं आया।
जो गरीब के हक के लिए
लड़ते हैं वो अमिर कैसे बन जाते हैं।
यू न झाँका करो
किसी गरीब के दिल में।
के वहा हसरतें
वेलिबास रहा करती है।
सर्दी, गर्मी, बरसात और
तूफ़ान मैं झेलता हूँ,
गरीब हूँ… खुश होकर
जिंदगी का हर खेल खेलता हूँ।
Garibi Shayari
कभी जात कभी समाज तो
कभी औकात ने लुटा,
इश्क़ किसी बदनसीब
गरीब की आबरू हो जैसे।
मैं क्या महोब्बत करूं किसी से,
मैं तो गरीब हूँ
लोग अक्सर बिकते हैं,
और खरीदना मेरे बस में नहीं
कही बेहतर है तेरी अमीरी से मुफसिली मेरी।
चंद सिक्के के ख़ातिर तू ने क्या नहीं खोया हैं।
माना नहीं है मखमल का बिछौना मेरे पास।
पर तू ये बता कितनी राते चैन से सोया है।
यहा गरीब को मरने
की जल्दी यूँ भी हैं।
के कही कफन महंगा ना हो जाए।
बिना किसी गाने के
रेल के इंजन की धुन पर नाचते हैं,
पटरी किनारे बस्ती में बच्चे
अब भी मुस्कराना जानते हैं।
गरीब नहीं जानता क्या है
मज़हब उसका
जो बुझाए पेट की
आग वही है रब उसका
अ़शक उनकी आँखों के करीब होते हैं।
रिश्ते दर्द के जिसको होते हैं।
दौलत अपने दिल की लुटा दी है जिसने।
कोई कहते हैं कि वो गरीब होते हैं।
Garibi Shayari
तुम रूठ गये थे जिस
उम्र में खिलौना न पाकर,
वो ऊब गया था
उस उम्र में पैसा कमा-कमा कर।
वो राम की खिचड़ी भी खाता है
रहीम की खीर भी खाता है
वो भूखा है जनाब उसे
कहाँ मजहब समझ आता है
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| Garibi Shayari |
जब भी देखता हूँ किसी गरीब को हँसते हुए
तो यकीन आ जाता है
की खुशियो का ताल्लुक दौलत से नहीं होता
कतार बहुत लम्बी थी इस लिए
सुबह से रात हो गयी
ये दो वक़्त की रोटी आज फिर
मेरा अधूरा ख्वाब हो गयी
घटाएं आ चुकी हैं आसमां पे…
और दिन सुहाने हैं
मेरी मजबूरी तो देखो
मुझे बारिश में भी काग़ज़ कमाने हैं
जरा सी आहट पर जाग
जाता है वो रातो को।
ऐ खुदा गरीब को बेटी
दे तो दरवाजा भी दे।
Garibi Shayari
हे ईश्वर तुमने जिन्दगी
इतनी जटिल क्यु बनाई,
कि गरीब दो वक्त के
रोती के लिए तरस रहे हैं…….!!
कतार बड़ी लम्बी थी,
के सुबह से रात हो गयी,
ये दो वक़्त की रोटी आज फिर
मेरा अधूरा ख्वाब हो गयी।
ग़रीब सियासत का
सबसे पसंदीदा खिलौना है,
उसे हर बार मुद्दा
बनाया जाता है हुकूमत के लिए।
ठहर जाओ भीड़ बहुत है,
तुम गरीब हो
कुचल दिए जाओगे।
क्या किस्मत पाई है
रोटीयो ने भी निवाला बनकर,
रहिसो ने आधी फेंक दी,
गरीब ने आधी में जिंदगी गुज़ार दी।
Garibi Shayari
सर्दी, गर्मी, बरसात और तूफ़ान मैं झेलता हूँ
गरीब हूँ… खुश होकर जिंदगी का हर खेल खेलता हूँ.
कैसे बनेगा अमीर वो
हिसाब का कच्चा भिखारी,
एक सिक्के के बदले
जो बीस किमती दुआ देता हैं।
कभी आंसू कभी ख़ुशी बेची,
हम गरीबों ने दुःख बेची,
चंद भर सांसे खरीदने के लिए
रोज थोड़ी-थोड़ी सी जिन्दगी बेची…….!!
घर में चुल्हा जल सकें इसलिए
कड़ी धूप में जलते देखा है,
हाँ मैंने ग़रीब की साँसों को भी
गुब्बारों में बिक़ते देखा है।
अजीब मिठास है
मुझ गरीब के खून में भी,
जिसे भी मौका मिलता है
वो पीता जरुर है
हमने कुछ ऐसे भी
गरीब देखे हैं ,
जिनके पास पैसों के
अलावा कुछ भी नहीं।
Garibi Shayari
अमीरी पीना सिखाती है,
गरीबी जीना सिखाती है,
कभी घाव हो जाए,तो
कविता सीना सिखाती है।
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| Shayari Garibi Par |
अमीरों के शहर में ही गरीबी दिखती है,
छोड़ दो ऐसा शहर जहाँ हवा बिकती है.
गरीबों की औकात ना पूछो तो अच्छा है
इनकी कोई जात ना पूछो तो अच्छा है
चेहरे कई बेनकाब हो जायेंगे
ऐसी कोई बात ना पूछो तो अच्छा है
ख्वाहिशें भी बड़ी महँगी है ,
ग़रीब के घर नही टिकती…
खैर आना अबकी बार तुम यादों में ,
मेरे ख़्वाबों में भेद नहीं है अमीर-गरीब का ।
गरीबी का एहसास जब
दिल में उतर जाता है,
गरीब का बच्चा जिद
करना भी भूल जाता है।
बहुत जल्दी सिख लेता हूँ
ज़िन्दगी का सबक।
गरीब बच्चा हूँ
बात बात पर जिद्द नहीं करता।
Garibi Shayari
थोड़े से लिबास में ख़ुश रहने का हुनर रखते हैं,
हम गरीब हैं साहब,
अलमारी में तो खुद को कैद करते हैं।
एक ज़िंदगी सड़कों पर,
एक महलों में बसर करती है,
कोई बेफिक्र सोता है
कहीं मुश्किल से गुज़र होती है।
खाली पेट सोने का दर्द
क्या होता मुझे नही पता,
ना जाने जूठन खा के
वो बच्चे कैसे बड़े हो जाते।
गरीबी का आलम कुछ इस कदर छाया है,
आज अपना ही दूर होता नजर आया है।
यूँ गरीब कहकर खुद
की तौहीन ना कर ए बदें ,
गरीब तो वो लोग है
जिनके पास ईमान नही।
पेट की भूख ने जिंदगी के ,
हर एक रंग दिखा दिए।
जो अपना बोझ उठा ना पाये ,
पेट की भूख ने पत्थर उठवा दिए।
Garibi Shayari
पेट की भूख ने जिंदगी के
हर एक रंग दिखा दिए
जो अपना बोझ उठा ना पाये
पेट की भूख ने पत्थर उठवा दिए
ग़रीब सियासत का सबसे
पसंदीदा खिलौना है,
उसे हर बार मुद्दा बनाया जाता है
हुकूमत के लिए।
ना के ताजमहल एक दौलतमंद
आशिक ने गरीबों की मोहब्बत
का तमाशा कर दिया।
मैं क्या महोब्बत करूं किसी से,
मैं तो गरीब हूँ
लोग अक्सर बिकते हैं,
और खरीदना मेरे बस में नहीं
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| Shayari Garibi Par |
अमीर लोग तो साहब
सपने देखे है raat को,
हम गरीब तो अपने बच्चों
के भूखे चेहरे देखते हैं…
रजाई की रुत गरीबी के
आँगन में दस्तक देती है ,
जेब गरम रखने वाले
ठण्ड से नहीं मरते।
गरीबी बन गई तश्हीर का सबब “आमिर”
जिसे भी देखो हमारी मिसाल देता है
रोज़ शाम मैदान में बैठ
ये कहतें हुए एक बच्चा रोता है,
हम गरीब है
इसलिए हम गरीब का कोई दोस्त नही होता है।
Garibi Shayari
गरीबों के बच्चे भी
खाना खा सके त्योहारों में।
तभी तो भगवान खुद
बिक जाते हैं बजारो में।
बहुत जल्दी सीख लेता हूँ
जिंदगी का सबक
गरीब बच्चा हूँ
बात-बात पर जिद नहीं करता
वो तो कहो मौत
सबको आती है वरना,
अमीर लोग कहते गरीब था
इसलिए मर गया।
इस कम्बख़्त मौत ने
सारा फासला ही मिटा दिया,
एक अमीर को लाकर गरीब
के पास ही लिटा दिया…
लगता था जहां में सबसे अमीर था।
जब तक तू करीब था।
आज तूने ये भ्रम भी तोड़ दिया।
मैं आज भी गरीब हूं, मैं तब भी गरीब था।।
बना के ताजमहल एक दौलतमंद
आशिक ने गरीबों की
मोहब्बत का तमाशा कर दिया।
शाम को थक कर टूटे
झोपड़े में सो जाता है
वो मजदूर,
जो शहर में ऊंची इमारतें बनाता है
Garibi Shayari
मैं कई चूल्हे की आग से भूखा उठा हूँ,
ऐ रोटी अपना पता बता,
तू जहाँ बर्बाद होती हैं।
बहुत जल्दी सीख लेते हैं,
ज़िन्दगी के सबक,
गरीब के बच्चे बात
बात पर जिद नहीं करते।
एक ज़िंदगी सड़कों पर,
एक महलों में बसर करती है,
कोई बेफिक्र सोता है कहीं मुश्किल से गुज़र होती है।
खुले आसमां के नीचे सोकर
भी अच्छे सपने पा लेते है,
हम गरीब है साहेब थोड़े
सब्जी में भी 4 रोटी खा लेते है।
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| Shayari Garibi Par |
जो गरीबी में एक दिया
भी न जला सका।
एक अमीर का पटाखा
उसका घर जला गया।
अब मैं हर मौसम में
खुद को ढाल लेता हूँ,
छोटू हूँ… पर अब मैं
बड़ो का पेट पाल लेता हूँ।
वो रोज रोज नहीं जलता साहब ,
मंदिर का दिया थोड़े ही है
गरीब का चूल्हा है।
साथ सभी ने छोड़ दिया,
लेकिन ऐ-गरीबी,
तू इतनी वफ़ादार कैसे निकली।
भटकती है
हवस दिन-रात सोने की दुकानों पर
गरीबी कान छिदवाती है
तिनके डाल देती है
Garibi Shayari
गरीबी की भी क्या
खूब हँसी उड़ायी जाती है,
एक रोटी देकर 100
तस्वीर खिंचवाई जाती है।
भूखे की थाली में भी
अनाज होना चाहिए,
साहब !!! गरीबों के लिए
भी जिहाद होना चाहिए।
घर में चुल्हा जल सकें इसलिए
कड़ी धूप में जलते देखा है,
हाँ मैंने ग़रीब की साँसों को
भी गुब्बारों में बिक़ते देखा है।
अमीरी पीना सिखाती है,
गरीबी जीना सिखाती है,
कभी घाव हो जाए,तो
कविता सीना सिखाती है।
कभी निराशा कभी प्यास है
कभी भूख उपवास,
कुछ सपनें भी फुटपाथों
पे पलते लेकर आस।
थोड़े से लिबास में ख़ुश रहने का हुनर रखते हैं,
हम गरीब हैं साहब,
अलमारी में तो खुद को कैद करते हैं।
जब भी देखता हूँ
किसी गरीब को हँसते हुए,
यकीनन खुशिओं
का ताल्लुक दौलत से नहीं होता।
Garibi Shayari
अच्छा हुआ जो गरीबी ने
संभल के खर्चना सिखाया था,
वर्ना आज उसके जाने पे
बे-फ़िज़ूल ही आँसू बह जाते।
गरीबो को गले लगाता कौन है,
उनके दर्द में आँसू बहाता कौन है ,
उनकी मौत पर सियासत छिड़ जाती है,
उनके जीते जी इज्जत दिलाता कौन है।
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| Garibi Shayari |
नये कपड़े,
मिठाईयाँ गरीब कहाँ लेते है,
तालाब में चाँद
देखकर ईद मना लेते है।
दोपहर तक बिक गया
बाजार का हर एक झूठ
और एक गरीब सच लेकर
शाम तक बैठा ही रहा
भूख ने निचोड़ कर रख दिया है जिन्हें ,
उनके तो हालात ना पूछो तो अच्छा है।
मज़बूरी में जिनकी लाज लगी दांव पर ,
क्या लाई सौगात ना पूछो तो अच्छा है।
कतार बड़ी लम्बी थी,
के सुबह से रात हो गयी,
ये दो वक़्त की रोटी आज
फिर मेरा अधूरा ख्वाब हो गयी।
Garibi Shayari
बिना किसी गाने के
रेल के इंजन की धुन पर नाचते हैं,
पटरी किनारे बस्ती में बच्चे
अब भी मुस्कराना जानते हैं।
कभी आँसू तो कभी खुशी बेचीं ,
हम गरीबों ने बेकसी बेची।
चंद सांसे खरीदने के लिए ,
रोज़ थोड़ी सी जिंदगी बेचीं।
घर में चूल्हा जल सके इसलिए
कड़ी धूप में जलते देखा है ,
हाँ मैंने गरीब की सांस
को गुब्बारों में बिकते देखा है।
अमीरी का हिसाब तो
दिल देख के कीजिये साहब
वरना गरीबी तो
कपड़ो से ही झलक जाती है
सहम उठते हैं
कच्चे मकान पानी के खौफ से।
महलोंं कि आरजू ये हैं
कि बरसात तेज हो।
उसकी गरीबी और
भूख का कोई अंदाजा तो लगाएं,
उसकी पीठ आतों से जाकर सटी हुई है।
हैरत की निगाहों से मूझे देखने वालो
हैरत की निगाहों से..मूझे देखने वालो,
लगता है तुम ने कभी समुदर नहीं देखा.
वो जिनके हाथ में
हर वक्त छाले रहते हैं,
आबाद उन्हीं के
दम पर महल वाले रहते हैं
गरीबी लड़तीं रही
रात भर सर्द हवाओं से,
अमीरी बोली वाह
क्या मौसम आया है।
Garibi Shayari
अजीब सा जादुई नशा होता है
गरीब की कमाई में,
जिसकी रोटी खाकर पथरीले
रास्तों पर भी सुकून की नींद आ जाती है।
मोहब्बत भी सरकारी
नौकरी लगती हैं साहब,
किसी गरीब को मिलती ही नहीं।
कैसे बनेगा अमीर वो हिसाब
का कच्चा भिखारी।
एक सिक्के के बदले जो
बीस किमती दुआ देता हैं
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| Shayari Garibi Par |
इसे नसीहत कहूँ या
जुबानी चोट साहब
एक शख्स कह गया
गरीब मोहब्बत नहीं करते
यूँ गरीब कहकर खुद
की तौहीन ना कर,
ए बंदे गरीब तो वो लोग है
जिनके पास ईमान नहीं है।
दोपहर तक बिक गया
बाजार का हर एक झूठ ,
और एक गरीब सच
लेकर शाम तक बैठा ही रहा।
ऐ सियासत… तूने भी
इस दौर में कमाल कर दिया,
गरीबों को गरीब
अमीरों को माला-माल कर दिया।
यहाँ गरीब को मरने की
इसलिए भी जल्दी है साहब,
कहीं जिन्दगी की कशमकश में
कफ़न महँगा ना हो जाए।
Garibi Shayari
हम गरीब लोग है
किसी को मोहब्बत के सिवा क्या देंगे ,
एक मुस्कराहट थी,
वह भी बेवफ़ा लोगो ने छीन ली।
कतार बहुत लम्बी थी इस लिए
सुबह से रात हो गयी
ये दो वक़्त की रोटी आज फिर
मेरा अधूरा ख्वाब हो गयी
खुले आसमां के नीचे सोकर
भी अच्छे सपने पा लेते है,
हम गरीब है साहेब थोड़े
सब्जी में भी 4 रोटी खा लेते है।
मरहम लगा सको तो किसी
गरीब के जख्मों पर लगा देना ,
हकीम बहुत हैं बाजार
में अमीरों के इलाज खातिर।
हर गरीब की थाली में खाना है,
अरे हाँ ! लगता है
यह चुनाव का आना है।
गरीबी का आलम कुछ
इस कदर छाया है,
आज अपना ही
दूर होता नजर आया है।
कभी जात कभी समाज तो
कभी औकात ने लुटा,
इश्क़ किसी बदनसीब
गरीब की आबरू हो जैसे।
Garibi Shayari
रजाई की रूत गरीबी
के आँगन दस्तक देती है,
जेब गर्म रखने वाले ठंड से नही मरते।
सुला दिया माँ ने
भूखे बच्चे को ये कहकर,
परियां आएंगी
सपनों में रोटियां लेकर।
क्या किस्मत पाई है रोटीयो
ने भी निवाला बनकर
रहिसो ने आधी फेंक दी,
गरीब ने आधी में जिंदगी गुज़ार दी
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| Garibi Shayari |
गरीबी बन गई तश्हीर का सबब “आमिर” ,
जिसे भी देखो हमारी मिसाल देता है।
जब भी मुझे जियारत करनी होती है ,
मै गरीब लोगो में बैठ आता हूं।
जनाजा बहुत भारी था
उस गरीब का,
शायद सारे अरमान
साथ लिए जा रहा था।
दोपहर तक बिक गया
बाजार का हर एक झूठ
और एक गरीब सच लेकर
शाम तक बैठा ही रहा
राहों में कांटे थे फिर भी
वो चलना सीख गया,
वो गरीब का बच्चा था
हर दर्द में जीना सीख गया।
Garibi Shayari
ऐ सियासत तूने भी इस दौर
में कमाल कर दिया
गरीबों को गरीब अमीरों को
माला-माल कर दिया
जो छिप गए थे चंद
रोज़ की ज़िंदगी कमाने,
मौत ने ढूँढ लिया
उनको मुफ़्लिसी के बहाने।
खिलौना समझ कर खेलते जो रिश्तों से ,
उनके निजी जज्बात ना पूछो तो अच्छा है।
बाढ़ के पानी में बह गए छप्पर जिनके ,
कैसे गुजारी रात ना पूछो तो अच्छा है।
कभी जात कभी समाज
तो कभी औकात ने लुटा,
इश्क़ किसी बदनसीब
गरीब की आबरू हो जैसे।
फ़ेक रहे तुम खाना क्योंकि,
आज रोटी थोड़ी सूखी है,
थोड़ी इज्ज़त से फेंकना साहेब,
मेरी बेटी कल से भूखी है।
तहजीब की मिसाल
गरीबों के घर पे है
दुपट्टा फटा हुआ है
मगर उनके सर पे है
ये गंदगी तो महल वालों
ने फैलाई है साहब,
वरना गरीब तो सड़कों
से थैलीयाँ तक उठा लेते हैं
अमीर की बेटी पार्लर
में जितना दे आती है
उतने में गरीब की बेटी
अपने ससुराल चली जाती है
हम गरीब लोग है किसी को
मोहब्बत के सिवा क्या देंगे ,
एक मुस्कराहट थी,
वह भी बेवफ़ा लोगो ने छीन ली।
Garibi Shayari
ऐ सियासत… तूने भी इस दौर
में कमाल कर दिया,
गरीबों को गरीब अमीरों को
माला-माल कर दिया।
साथ सभी ने छोड़ दिया,
लेकिन ऐ-गरीबी,
तू इतनी वफ़ादार कैसे निकली।
कभी निराशा कभी प्यास है
कभी भूख उपवास,
कुछ सपनें भी फुटपाथों
पे पलते लेकर आस।
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| Shayari Garibi Par |
फ़ेक रहे तुम खाना क्योंकि,
आज रोटी थोड़ी सूखी है,
थोड़ी इज्ज़त से फेंकना साहेब,
मेरी बेटी कल से भूखी है।
हम गरीब लोग है किसी को
मोहब्बत के सिवा क्या देंगे
एक मुस्कराहट थी,
वह भी बेवफ़ा लोगो ने छीन ली
गरीब भूख से मरे तो
अमीर आहों से मर गए।
इनसे जो बच गए वो झूठे
रिवाजों से मर गए।।
घर में चूल्हा जल सके इसलिए
कड़ी धूप में जलते देखा है
हाँ मैंने गरीब की सांस को
गुब्बारों में बिकते देखा है
Garibi Shayari
साथ सभी ने छोड़ दिया,
लेकिन ऐ-गरीबी,
तू इतनी वफ़ादार कैसे निकली।
कभी जात कभी समाज तो
कभी औकात ने लुटा,
इश्क़ किसी बदनसीब
गरीब की आबरू हो जैसे।
यहाँ गरीब को मरने की इसलिए
भी जल्दी है साहब,
कहीं जिन्दगी की कशमकश
में कफ़न महँगा ना हो जाए।
गरीबों की औकात ना पूछो तो अच्छा है,
इनकी कोई जात ना पूछो तो अच्छा है।
चेहरे कई बेनकाब हो जायेंगे ,
ऐसी कोई बात ना पूछो तो अच्छा है।
Shayari Garibi Par
भूख और गरीबी,
ये खुद अपने लिए जितनी रोटियाँ नहीं बटोर पाते,
उससे ज़्यादा तो इनकी फोटो खींचकर लोग हमदर्दी बटोर लेते हैं।
जहाँ इनके सीलन भरे जर्जर झोंपड़ों में एक वक्त चूल्हा मुश्किल जलता है,
वहाँ इनकी कहानियों पर फिल्में और किताबें बेहिसाब कमाती हैं।
जज़्बात बिकते ज़रूर हैं पर जिनके हैं उन्हें अक्सर कीमत मिलती नहीं।
आज इन खाली सड़कों ने बताया है।
इंसा ने प्रकृति को कितना सताया है।
जिनकी खता वो उड़कर चले आए,
गरीब मीलो पैदल ही चला आया है।
गरीब है साहब इसलिए मोहोब्बत
और सपने दोनो अधोरे रह गए ।
कभी हमने भी किसी के
खयालो का आशियाना बनाया था ??
मैं गरीब हूं साहब।।
बाहर गया तो बीमारी मार देगी।।
और अन्दर भूख जीने नहीं देगी।।
मिज़ाज हमेशा आलिशान गाडीसे
उतरने वालों का होता हैं ।
भूल जाते हैं साहब उनका कामतो
गरीबोंसे होकर होता है।
Shayari Garibi Par
अपने अमीरी का जरा हिस्सा गरीबों में बांट देना,
जात-पात मत देखना जो मिले सबका साथ देना,
यहां तो हर किसी की जिंदगी दांव पर लगी हैं,
मिल जाए कोई असहाय तो जरा बढ़ा हाथ देना!
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| Garibi Shayari |
गरीब होता है अमीर बहुत अमीर ,
दो रोटी न दे पाए किसी को वो होता है
गरीब. बहुत गरीब.
यार माना कि ग़रीब हैं,
पर छुपाओ मत
कि तुम्हारे दिल क़रीब हैं।
ये वो शब्द हैं जो होता हैं वो वही समझ सकता हैं,
वरना गरीब का सिर्फ औऱ सिर्फ मतलब
आज के इस मतलबी दुनिया मे बस मज़ाक उड़ाने में होता हैं??
बेखबर बेअदब बेतरतीब था मैं,,
बेरुखा चिड़चिड़ा बहुत अजीब था मैं,,
तुम साथ लाई हो बरकत अपने,,
तुम्हारे बिना बहुत गरीब था मैं!
अजीब रिवाज़ हैं इस दुनिया का ,
दौलतमंदों की ‘मोहब्बत’ की मिसालें दी जाती हैं ,
और एक ग़रीब की ‘मोहब्बत’ हास्य-व्यंग्य बन कर
रह जाती हैं ।
ख्वाहिशें भी बड़ी महँगी है ,
ग़रीब के घर नही टिकती…
खैर आना अबकी बार तुम यादों में ,
मेरे ख़्वाबों में भेद नहीं है अमीर-गरीब का ।
Shayari Garibi Par
गरीब वह नहीं है जो एक वक्त
की रोटी के लिए मजबूर हैं ,
गरीब वह है जो किसी भी गलती
को सुधारने के लिए तैयार नहीं हो।
गरीबी और गुलामी कोई ज़िन्दगी नहीं होती साहेब,
बनना छोड़िए बस महसूस ही कर लीजिए…
जो शौकीन सपने आप दिन में पालते हैं,
वो सपने रात को टूटी चारपाई और बद-मैले बिस्तरों पर सो तक नहीं पाते…
गरीब और अमीर दोनों मंदिर में जाते हैं…
फर्क बस इतना है कि अमीर लोग मंदिर
में जाकर भिख मांगते है और
गरीब लोग मंदिर के बाहर…!
कुछ को रोशनी मे सुकून नही,कोई अंधियारे मे पाता है
उस गरीब को एक ताजी रोटी भी नसिब नही
वो बासि भी आधी खा लेता है।
कैसे भरोशा करे अमीरो के प्यार पर
ये ब्याज सहित निकाल लेता है
गरीबो के मज़बूरियों पर
Shayari Garibi Par
हैरत की निगाहों से मूझे देखने वालो
हैरत की निगाहों से..मूझे देखने वालो,
लगता है तुम ने कभी समुदर नहीं देखा.
वह गरीब है धन से ईमान से नही वह गरीब है
पर ईमानदार है मेहनत की दो रोटी खाता है
फिर भी दूसरों के लिए अपनापन रखता है
वह गरीब है फिर भी अपनों के लिए जीता है
गरीबों के नाम से ना जाने
के कितने राजा बन गया पर
आज तक गरीबी ना मिटी ..
गरीबी हटाओ का नारा आया
जहां गरीबों को ही हटाया गया था
आज भी गलती पासपोर्ट की थी
और मरा बेचारा राशन कार्ड जा रहा
जय हिन्द ?
मेरे अंदर के अंगार को लोग राख समझ लेते है,
मज़बूरी नहीं समझता कोई,
मेरी गरीबी को लोग मज़ाक समझ लेते है।
लगता था जहां में सबसे अमीर था।
जब तक तू करीब था।
आज तूने ये भ्रम भी तोड़ दिया।
मैं आज भी गरीब हूं, मैं तब भी गरीब था।।
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| Shayari Garibi Par |
मेरी फटी जेब मुझे गरीब कहती थी,
दिल के दौर से गुज़रा तो जाना
यहा मुझसे रईस कोई न था।
तु है गरीब धन से.., हिम्मत से नही..,
यदि तुझे अपनी मंजिल ही प्यारी है तो..,
रास्ता बदल ले.., पर रूखना नही, और झुकना नहीं?
Shayari Garibi Par
गरीब की बस्ती में ज़रा जाकर तो देखो,
वहां बच्चे भूखे तो मिलेंगे,
मगर उदास नहीं ।।
गरीब की किस्मत ही खोटी मिलती है,
मेहनत के अनुसार आमदनी छोटी मिलती है,
दिन भर खून पसीना एक करते है, तब जाकर,
रात को खाने में आधी रोटी मिलती है।
खुदा से की गई सारी शिकायते,
उस वक़्त मुझे बेमतलब सी लगी,
जब वास्तविक जरुरतमंदो को मेने,
खिलखिला कर हस्ते देखा ।।
पैसों की गरीबी अच्छी होती है,
दिल की गरीबी से,
तन्हाई अच्छी है मतलब की करीबी से ।
एक गरीब रात को सो कर
रोटी के सपने देखता है,
और अगली रात भूख से फिर सो भी नहीं पाता ।
बड़ा बेदर्द है यह ज़माना मेरे दोस्तों,
यहाँ किसी का दर्द नहीं देखते लोग,
लेकिन दर्द की तस्वीर खींच लेते है लोग ।।
मेरे कपड़ो से ना कर मेरे किरदार का फैसला,
तेरा वजूद मिट जायगा,
मेरी हकीकत जानते जानते ।।
इंसानो की बस्ती में यह केसा शोर है,
अमीरों का घर भरा हुआ है,
और गरीब भूखे पेट सो रहा है ।
गरीब को गरीबी नहीं मारती है,
मारती है अमीरों की असंवेदनशीलता,
अमीरों का छल, अमीरों का लालच,
क्योंकि गरीब मरता नहीं है मारा जाता है…..
Shayari Garibi Par
अगर अपनी बातों से किसी के
होठों पर एक मुस्कान भी ना
ला सको.. तो हाँ गरीब हो तुम…
क्या महल क्या शहर यंहा पे,
अब रौनक से अटी हर बस्ती है,
#गरीब अमीर का भेद मिटाकर ,
जिन्दगी महंगी, और दौलत सस्ती है ।
शहरोंमेंमें मैंने कई शामियाने देखें हैं।
हम तो गरीब है साहब,
झोपड़ों में ख्वाब सजाएं बैठे हैं।।
उसके प्रेम में मैं कुछ इस प्रकार से खो गया हूँ,
लिखता तो हूँ पर शब्दों से गरीब से हो गया हूँ,
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| Garibi Shayari |
तंगहाली को इंसान पे ऐसे हावी देखा है मेने,
जिस्म को हवस के हवाले करते देखा है मेने ।।
गरीब ज़िन्दगी भर पैसे के लिए काम करता है…
जबकि, पैसा अमीरों के लिए काम करता है..!!?
अपनी ज़िन्दगी में हर कोई अमीर है,
गरीब तो यह ख्वाहिश बना देती है ।
Shayari Garibi Par
जनाजा बहुत भारी था उस गरीब का,
शायद सारे अरमान साथ लिए जा रहा था
आजकल वो ही स्वस्थ है जो गरीब है,
पैसे वाले लोग तो कोरोना के करीब है।
चले जिसपे सबका ज़ोर… किसी बदनसीबी है,
हा हा हा सही पहचाना, यही गरीबी है ।।
कितना खौफ होता है शाम के अँधेरे में,
पूछ उन परिंदो से जिनके घर नहीं होते है ।
बदन काँप रहा था किसी का ठण्ड से,
और जुटे वाले बोले, वाह क्या गुलाबी मौसम है।
सुबह से घूम रहा था वो एक रोटी की तलाश में,
आखिर थक कर तब्दील हो गया वो एक मुर्दा लाश में ।।
ऐ खुदा तेरी बनाई इस दुनिया में हर अच्छे बुरे का हिसाब,
क्यों गरीबी से ही लिया जाता है ।
वो कुछ इस तरह गरीबी को हरा देते है,
जब बिना कपडे बिना खाने के भी वो मुस्कुरा देते है ।।
खुदा के दिल को भी सुकून आता होगा,
जब कोई गरीब चेहरा मुस्कुराता होगा।?
अजीब मिठास है मुझ गरीब के खून में भी,
जिसे भी मौका मिलता है वो पिता ज़रूर है ।।
गरीब की हाज़त रावइ तू ही किया कर मेरे मोला,
तेरे बन्दे बड़ा जलील करते है ।
Shayari Garibi Par
घर जाके जब बच्चो को खाना खिलाया होगा,
बच्चो को क्या मालूम बाप ने किस हाल में कमाया होगा ।।
गरीब शब्द अपने आप में गरीब नहीं है !
आज दुनिया की बहुत बड़ी आबादी पर राज कर रहा है !
पैरों के जख्म दिखा कर जो अपना घर चलता है साहब,
वो शख्स महज़ अपने जख्म भर जाने से डरता है ।
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| Garibi Shayari |
जो अमीर था कल तक आज वो फ़क़ीर बन गया,
वक़्त है साहेब, चाँद पलों में ही कितनो का नसीब बदल गया ।।
दिखने में वो गरीब थे साहब,
मगर उनकी हसीं नवाबो से काम नहीं…!
कोई किसी का ख़ास नहीं होता,
जब पैसा पास नहीं होता ।।
बड़े बुजुर्ग कहते है की गरीब व्यक्ति की हाय,
और दोगले व्यक्ति की राय कभी नहीं लेनी चाहिए ।
अमीरों की छत पर बारिश होती है,
गरीबों की छतो से बारिश होती है ।
Shayari Garibi Par
शहर को तराशने गया था, मैं अमीर था इतना,
ग़रीब इतना कि अश्क़ बेचकर घर लौटना पड़ा.
जान दे सकते है बस एक यही हमारे बस में है,
सितारे तोड़ के लेन की बात हम नहीं करते ।।
मैं देखती रही उसे उसकी ख़ामोशी को सुनती रही,
एक बच्ची अमीरो से बिख मांग कर कई सपने बुनती रही ।।
अमीरों की औलादो को चाय पसंद नहीं आती,
और गरीबो की औलादे चाय बेचकर रोज़ी कमाते है ।
मगन था में, सब्ज़ी में कमी निकालने में,
और खुदा से सुखी रोटी का शुक्र मना रहा था ।
ज़िन्दगी आज किस मोड़ पे आ खड़ी है,
की गरीबी महंगाई से आ लड़ी है।
दान करना ही है तो गरीबो को दान कर ऐ इंसान,
कब तक मंदिर मस्जिद को अमीर बनता रहेगा ।।
गरीबी में भोजन ना सही, पानी से गुज़ारा कर लेते है,
कैसे बताये हम गरीबी में कुछ भी समझौता कर लेते है ।
जब खुदगर्ज़ी जज़्बातो के करीब हो जाती है,
तब मुकम्मल रिश्तो में भी गरीबी हो जाती ।।
Shayari Garibi Par
जब भी देखता हूँ गरीब को मुस्कुराते हुए,
समाज जाता हूँ की यक़ीनन खुशियों का ताल्लुक दौलत से नहीं होता।
गरीबी मेरे घर की,
छीन ले गई मेरे सामने से बचपन मेरा ।।
लोग गरीबो से अपना करीब का रिश्ता छुपाते है,
और अमीरो से दूर का रिश्ता भी निभाते है ।।
राजी रहा करो खुदा की राजा में जनाब,
तुमसे भी बहुत मजबूर है इस जहाँ में।
डिग्री लेकर रिक्शा खींचे युवक इन बाज़ारों में,
अनपढ़ नेता डोरे पर है महंगी महंगी करों में ।।
गरीबी वो बीमारी है साहब
जो ला इलाज है!! इस देश मे
तहज़ीब की मिसाल गरीबो के घर पे है,
दुपट्टा फटा हुआ है मगर उसके सर पर है ।
बड़ी बेशर्म है यह गरीबी
कम्बख्त उम्र का भी लिहाज़ नहीं करती ।।
नज़र आपकी खूबसूरत होनी चाहिए,
हम गरीब फटे कपड़ो में भी खूबसूरत नज़र आयंगे ।
Shayari Garibi Par
रहीस जादे ही रहे होंगे जिन्हें अपनी मोहब्बत मिली.
गरीब का प्यार तो अक्सर चौराहे पर ही नीलाम हो जाता है ??
यु ही नहीं दर बदर फिरते है ये गरीब
कई ऊँची इमरतो ने इनके घर उजाड़ दिए
अपनी गरीबी पर अफ़सोस ना करना मेरे दोस्त,
मैंने अक्सर अमीरों को ज़रा सी सुकून के लिए तरसते देखा है ।।
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| Garibi Shayari |
किसी की गरीबी की मज़ाक मत बनाना यारों,
क्योकि कमल अक्सर कीचड़ में ही पैदा होता है ।
राहों में कांटे थे फिर भी वो चलना सीख गया,
वो गरीब का बच्चा था हर दर्द में जीना सीख गया ।।
एक गरीब दो रोटियों में पूरा दिन गुज़र देता है,
वो ख्वाहिशो को पालता नहीं मार देता है ।।
ख्वाहिशे गिरवी रख मैं चेन से सोया,
यूँ ताउम्र मेने अपनी गरीबी को खोया ।।
















