340+Zulf Shayari in Hindi| ज़ुल्फों पर हिंदी शायरी

Zulf Shayari
 julfe shayari

When there is talk of poetry and there is mention of ghatao, then there is only one thought in the mind, that is only of the hair of my beloved, my heart only says that every morning and evening passed in the shadow of her haire  Every poet praises his beloved in his poetry, sometimes as a black cloud, sometimes as a cool shade, sometimes as a confused heart's desire, sometimes as a pleasant night. The pen of the poet gets lost in the hair like the moon hides in the clouds. Zulf Shayari, Julfe Shayari, Zulfein Shayari, Shayari On Zulfein, Zulfein Poetry 2 Line

Zulf Shayari


पूछा जो उन से चाँद 

निकलता है किस तरह 

ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल 

के झटका दिया कि यूँ 


आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ़ को बादल लिखो,  

जिस से नाराज़ हो उस शख्स की हर बात लिखो, 

जिस से मिलकर भी न मिलने की कसक बाक़ी है, 

उसी अनजान इंसान की मुलाक़ात लिखो।


ये किसका ढल गया है आँचल, 

तारों की निगाह झुक गयी है, 

ये किसकी मचल गयी हैं जुल्फें, 

जाती हुई रात रुक गयी है।

julfe shayari
  zulfein shayari

किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी 

झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी 


बिखरने दे तेरी खुशबू महक जाने 

दे फिजाओं को, खुलके बिखरने दे 

जुल्फों को, बरस जाने दे घटाओं को।


जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे 

तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे 


चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ 

किसी दिन, क्यों रोज़ गरजते हो 

बरस जाओ किसी दिन।


आवारा सी ज़ुल्फ तुम्हारी गालों को 

जब सहलाती है, 

हसीन  बेशक उस वक़्त लगती हो,  

पर मुझे तेरी जुल्फे जलाती है।


आंसमा पे सरकता चाँद, 

और कुछ रातें थी सुहानी,  

तेरी जुल्फों से गुजरती हुई उंगलियाँ, 

और तेरी साँसे थी जैसे मीठा पानी।


Zulf Shayari

कुछ बिखरी हुई यादों 

के क़िस्से भी बहुत थे 

कुछ उस ने भी बालों 

को खुला छोड़ दिया था 


उनकी गहरी नींद का मंज़र भी 

कितना हसीन होता होगा, 

तकिया कहीं, ज़ुल्फ़ें कहीं,, 

और वो खुद कहीं।


उड़े जब-जब जुल्फें तेरी कंवारियों का 

दिल मचले कंवारियों का दिल 

मचले, जिन्द मेरिये ।


ये उड़ी उड़ी सी रंगत ये खुले खुले से गेसू 

तिरी सुब्ह कह रही है तिरी रात का फ़साना 


कोई हवा का झोंका, जब तेरी 

जुल्फों को बिखराता है, कसम खुदा की, 

तू बड़ा ही कातिल नजर आता है।


तुम्हारी जुल्फ के साये में शाम कर लूँगा, 

सफ़र इस उम्र का पल में तमाम कर लूँगा, 

नज़र मिलाई तो पूछूंगा इश्क का अंजाम, 

नज़र झुकाई तो खाली सलाम कर लूँगा।


दिसम्बर से भी ठण्डा है तेरी ज़ुल्फ़ का साया, 

जी चाहता है की  जून तेरे पास आकर गुजारूं।


ऐ जुनूँ फिर मिरे सर पर 

वही शामत आई 

फिर फँसा ज़ुल्फ़ों में दिल 

फिर वही आफ़त आई 


Zulf Shayari

माथे को चूम लूँ मैं और, उनकी 

जुल्फ़े बिखर जाये, इन लम्हों के इंतजार में, 

कहीं जिंदगी न गुज़र जाये।


नींद उस की है दिमाग़ उस का है 

रातें उस की हैं 

तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू 

पर परेशाँ हो गईं 


तेरे जुल्फों के अंधियारे में अपना शहर 

भूल आया, मैं वही शख्स हूँ जो तेरे दिल में, 

अपना घर भूल आया।

zulfein shayari
 shayari on zulfein

तेरी जुल्फों से नज़र मुझसे हटाई न गई, 

नम आँखों से पलक मुझसे गिराई न गई।


आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ़ को बादल लिखो,  

जिस से नाराज़ हो उस शख्स की हर बात लिखो, 

जिस से मिलकर भी न मिलने की कसक बाक़ी है, 

उसी अनजान इंसान की मुलाक़ात लिखो।


पहले जुल्फ, फिर होठ, 

फिर दिल पे हावी तेरे नैन  हो गये, 

तुने चार दफा Dpबदली हम चार  

दफा तेरे  फैन हो गये।


न तो दम लेती है तू और न हवा थमती है, 

ज़िन्दगी ज़ुल्फ़ तेरी कोई सँवारे कैसे।


पहले जुल्फ, फिर होठ , फिर दिल पे  

हावी तेरे नैन हो गये, तुने तीन  दफा 

बदली डीपी, हम  तीन  दफा तेरे  

फैन हो गये।


खी थी एक रात तिरी ज़ुल्फ़ ख़्वाब में 

फिर जब तलक जिया मैं परेशान ही रहा 


रुख-ए-यार पे यह जुल्फें, 

यूँ फिसल रही है, 

कभी दिन निकल रहा है, 

कभी रात ढल रही है।


Zulf Shayari

जब भी मुँह ढँक लेता हूँ तेरी 

जुल्फों की छाँव में, जाने कितने गीत 

उतर आते हैं मेरे मन के गाँव में।


न झटको ज़ुल्फ़ से पानी ये मोती टूट जाएँगे 

तुम्हारा कुछ न बिगड़ेगा मगर दिल टूट जाएँगे 


इजाज़त हो तो मैं तस्दीक़ 

कर लूँ तेरी ज़ुल्फ़ों से 

सुना है ज़िंदगी इक 

ख़ूबसूरत दाम है साक़ी 


ज़ुल्फ़ रातों सी , रंगत है उजालों जैसी, 

पर तबियत है वही , भूलने वालों जैसी. 

ढूढ़ता फिरता हूँ , लोगों में शबाहत उसकी, 

के वो ख्वाबों में भी लगती है , ख्यालों जैसी।


बडे गुस्ताख हैं, झुक कर तेरा चेहरा 

चूम लेते हैं, तुमने भी जानम, 

जालिम ज़ुल्फ़ों को सर चढा रखा है।


तुम्हारी ज़ुल्फ़ों के साये में शाम 

कर लूंगा, सफर इस उम्र का 

पल में तमाम कर लूंगा।


फूक मार के वो अपनी जुल्फों को संवारती है, 

लगता है जैसे हवा भी उसकी गुलाम है।


 तेरी खुली~खुली सी ज़ुल्फ़ें, 

इन्हें लाख तुम संवारो अगर हम 

संवारते तो,कुछ और बात होती।

shayari on zulfein
zulfein poetry 2 line

उनके हाथों में मैंहदी लगाने का. 

ये फायदा हुआ हमें, 

कि रात-भर चेहरे से उनके,   

ज़ुल्फें हटाते रहे हम।


हाथ टूटें मैं ने गर छेड़ी 

हों ज़ुल्फ़ें आप की 

आप के सर की क़सम 

बाद-ए-सबा थी मैं न था 


रूठ कर तेरी जुल्फों से 

चाँद भी सहम गया,  

दागदार तो था ही बादलों 

में भी छिप गया।


किसी ने पूछा कौन याद आता है, 

अक्सर तन्हाई में, हमने कहा कुछ 

पुराने रास्ते, खुलती ज़ुल्फे और 

बस दो आँखें।


Zulf Shayari

माथे को चूम लूँ मैं और 

उनकी जुल्फ़े बिखर जाये, 

इन लम्हों के  इंतजार में 

कहीं जिंदगी न गुज़र जाये।


मेरी उंगलियाँ फिर तेरी जुल्फों से गुज़र जायें, 

जब तू पलकें झुकाकर फिर मेरी 

ज़िन्दगी में चली आये।


जूल्फों से यूँ चेहरे को छुपाते क्यूँ हो, 

शर्माते हो तो सामने आते क्यूँ हो, 

कर लो मेरी तरह इकरार तुम भी अब, 

प्यार करते हो तो छुपाते क्यूँ हो।


हम कहाँ से अपने दिल को समझाये, 

आप ने यूँ जुल्फ जो बिखेरी है।


बिखरी हुई थी जुल्फे वही आँखोमें नमी थी, 

हम चाहकर भी पूरी ना कर सके,  

ऐ-जिंदगी तूझमें ऐसी क्या कमी थी।


Julfe Shayari


बड़े गुस्ताख हैं

झुक कर तेरा मुँह चूम लेते हैं,

बहुत सा तू ने

ज़ालिम गेसुओं को सर चड़ाया है।


आवारा सी ज़ुल्फ तुम्हारी

गालों को जब सहलाती है,

हसीन बेशक उस वक़्त लगती हो,

पर मुझे तेरी जुल्फे जलाती है।


तेरी जुल्फें जब बिखर जाती है,

ए हसीना तू और

भी हसीन हो जाती है।


तेरे ज़ुल्फ़ों की तरह है काले बादल,

आग लगाना तो बखूबी आता है,

लेकिन बुझाना नही आता!!


संवारों न ऐसे अपने ज़ुल्फ़ों को,

गिरे जब तुम्हारे चेहरे पर तो

धड़क उठता है मेरा दिल !!


तेरी जुल्फे इशारो में कह गयी मुझे,

मैं भी शामिल थी तुझे बर्बाद करने में.


Julfe Shayari

उलझा हूँ

मैं तेरे ज़ुल्फ़ों के साये तले,

सुलझ जाऊंगा मैं

फिर जब तू लगा लेगी मुझे गले !!

Zulf Shayari
julfe shayari

दिसम्बर से भी ठण्डा है

तेरी ज़ुल्फ़ का साया, जी चाहता है

की जून तेरे पास आकर गुजारूं।


माथे को चूम लूँ मैं और,

उनकी जुल्फ़े बिखर जाये,

इन लम्हों के इंतजार में,

कहीं जिंदगी न गुज़र जाये।


ये किसका ढल गया है आँचल,

तारों की निगाह झुक गयी है,

ये किसकी मचल गयी हैं जुल्फें,

जाती हुई रात रुक गयी है।


तेरी जुल्फों की छाँव के

भी तजुर्बे अजब रहे,

जब-जब किया तूने साया,

झुलसता ही रहा हूँ।


खोल दे इन काली जुल्फों को ,

बरसात आये हुए भी

एक अरसा सा लगने लगा है !!


पुकारतीं मुझे जब तल्खियाँ ज़माने की,

तेरे लबों से हालावत के घूट पे लेता,

हयात चीखती फिरती बढ़ाना-सर और मैं,

घनेरी जुल्फों के साए में छुप के जी लेता।


Julfe Shayari

कुछ और भी हैं काम हमें ऐ ग़म-ए-जाना,

कब तक कोई उलझी हुई ज़ुल्फ़ों को सँवारे।


इतनी ठंडक मिलती है तेरी

ज़ुल्फ़ों के साये में कि,

जी चाहता है की पूरी गर्मी तेरे

ज़ुल्फ़ों के छांव में गुज़ारूं!!


ज़ुल्फ़ तेरी एक घनेरी शाम

की बदल है,

जो हर शाम रंगीन कर दे, ऐसी

वो तेरी आँचल है !!


ल्फें तुम्हारी परेशान करती है अक्सर,

उठती है लहरें समंदर की तरह !!


शायद इश्क़ हो गई है मेरी ज़िन्दगी

को तुम्हारे ज़ुल्फो से,

चाहे जितना भी मै इसे संभालू,

ये उलझती ही जाती है !!


बहुत चालाकी से तेरे गालों को चूम लेती हैं;

इन ज़ुल्फ़ों को भी तूने सिर पर चढ़ा रखा हैं !!


झटक कर ज़ुल्फ़ों को कर देती हो

पानियों को आज़ाद,

ये आदत है या रिझाने की अदा

है तुम्हारी !!


इतनी ठंडक मिलती है तेरी

ज़ुल्फ़ों के साये में कि,

जी चाहता है की पूरी गर्मी तेरे

ज़ुल्फ़ों के छांव में गुज़ारूं!!


रात की मदहोशी को तो जैसे तैसे

संभाला था मैंने,

सुबह उन्होंने ज़ुल्फ़ झटक के फिर से

बेहोश कर दिया !!


क्या खूब नजारा होता तुझे सोते

हुए देखने को,

सँवारत मैं तेरे ज़ुल्फ़ों को और

निहारता तेरे चेहरे को !!

shayari on zulfein
zulfein poetry 2 line

चाँद से रौशन जैसी तेरे चेहरे

को देख के मैं सुलझ जाऊ,

एक दफ़ा तु लगा ले गले मुझे,

दिल चाहता है की तेरे ज़ुल्फ़ों मे उलझ जाऊ!!


तेरे ज़ुल्फ़ों की तरह है काले बादल,

आग लगाना तो बखूबी आता है,

लेकिन बुझाना नही आता!!


अदा है मेरे महबूब को ज़ुल्फ

को सँवारने की,

चाँद से खूबसूरत है वो,

क्या ज़रूरत है इसे और निखारने की !!


अपनी जुल्फों से कह दो काबू में रहे,

तुम्हारे गालो को चूमने

का हक सिर्फ मेरा हैं।


बहुत चालाकी से तेरे गालों को चूम लेती हैं;

इन ज़ुल्फ़ों को भी तूने सिर पर चढ़ा रखा हैं !!


रुख-ए-यार पे यह जुल्फें,

यूँ फिसल रही है,

कभी दिन निकल रहा है,

कभी रात ढल रही है।


शायद इश्क़ हो गई है मेरी ज़िन्दगी

को तुम्हारे ज़ुल्फो से,

चाहे जितना भी मै इसे संभालू,

ये उलझती ही जाती है !!


खुदखुशी करने से

मुझे कोई परहेज नही है,

बस शत॔ इतनी है

कि फंदा तेरी जुल्फों का हो।


उनकी गहरी नींद का मंज़र भी

कितना हसीन होता होगा,

तकिया कहीं, ज़ुल्फ़ें कहीं,,

और वो खुद कहीं।


Julfe Shayari

हाथ टूटे मैंने गर छेड़ी

हो जुल्फें आप की,

आप के सर की

कसम बाद-ए-सबा थी मैं न था।


पहले जुल्फ, फिर होठ , फिर दिल पे

हावी तेरे नैन हो गये, तुने तीन

दफा बदली डीपी,

हम तीन दफा तेरे फैन हो गये।


तेरी जुल्फों की ज़ंजीर

मिल जाती तो अच्छा था,

तेरे लबों की वो लकीर

मिल जाती तो अच्छा था।


ये उड़ी उड़ी सी रंगत

ये लुटी लुटी सी जु़ल्फ़ें,

तेरी हालत बता रही है

ज़िंदगी का फ़साना।


उनके हाथों में मैंहदी लगाने का.

ये फायदा हुआ हमें,

कि रात-भर चेहरे से उनके,

ज़ुल्फें हटाते रहे हम।


आंसमा पे सरकता चाँद,

और कुछ रातें थी सुहानी,

तेरी जुल्फों से गुजरती हुई उंगलियाँ,

और तेरी साँसे थी जैसे मीठा पानी।

Zulf Shayari
 julfe shayari

दिल उसकी तार-ए-ज़ुल्फ़ में उलझ गया,

सुलझेगा किस तरह से ये बिस्तार है ग़ज़ब।


तेरी काली जुल्फेँ और

मुस्कराते होठोँ की लाली,

लोगोँ को दीवाना बना देती है।


बिखरने दे तेरी खुशबू महक जाने दे

फिजाओं को, खुलके बिखरने दे

जुल्फों को, बरस जाने दे घटाओं को।


Julfe Shayari

तेरी ज़ुल्फ़ क्या संवारी,

मेरी किस्मत निखर गयी,

उलझने तमाम मेरी,

दो लट में संवर गयी।


ये उड़ती ज़ुल्फें, ये बिखरी मुस्कान,

एक अदा से संभलूँ, ,

तो दूसरी होश उड़ा देती है।


बड़ी आरजू थी

महबूबा को बेनक़ाब देखने की,

दुपट्टा जो सरका तो ज़ुल्फ़ें दीवार बन गयी।


चाँद से रौशन जैसी तेरे चेहरे

को देख के मैं सुलझ जाऊ,

एक दफ़ा तु लगा ले गले मुझे,

दिल चाहता है की तेरे ज़ुल्फ़ों मे उलझ जाऊ!!


हमारे दिल की हालत

गेसू-ए-महबूब जाने है,

परेशान की परेशानी

को परेशान खूब जाने है.


लहराती ज़ुल्फें कजरारे नयन और

ये रसीले होंठ, बस कत्ल बाकी है

औज़ार तो सब पूरे हैं।


बिखरी हुई थी जुल्फे वही आँखोमें नमी थी,

हम चाहकर भी पूरी ना कर सके,

ऐ-जिंदगी तूझमें ऐसी क्या कमी थी।


अदा है मेरे महबूब को ज़ुल्फ

को सँवारने की,

चाँद से खूबसूरत है वो,

क्या ज़रूरत है इसे और निखारने की !!


रूठ कर तेरी जुल्फों

से चाँद भी सहम गया,

दागदार तो था

ही बादलों में भी छिप गया।


बिजलियों ने सीख ली

उनके तबस्सुम की अदा,

रंग ज़ुल्फ़ों की चुरा लाई घटा बरसात की।


Julfe Shayari

जुल्फे खोली हैं उन्होंने आज,

और सारा शहर बादलो

को दुआ दे रहा हैं।


अंदाजा होता अगर

तुझे मेरी उलझनों का,

तो तू इतने आराम से

अपनी ज़ुल्फें न सुलझा रही होती !!


न तो दम लेती है

तू और न हवा थमती है,

ज़िन्दगी ज़ुल्फ़ तेरी कोई सँवारे कैसे।


बड़ी बेअदब हैं

जुल्फें आपकी हर

वो हिस्सा चूमती हैं,

जो ख्वाहिश है मेरी।


बिजलिओं ने सीख ली

उनके तबस्सुम की अदा,

रंग जुल्फों का चुरा

लिया घटा बरसात की।

julfe shayari
 zulfein shayari

क्या खूब नजारा होता तुझे सोते

हुए देखने को,

सँवारत मैं तेरे ज़ुल्फ़ों को और

निहारता तेरे चेहरे को !!


फूक मार के वो

अपनी जुल्फों को संवारती है,

लगता है जैसे हवा भी उसकी गुलाम है।


देख लेते जो आप मेरे

दिल की परेशानी को,

बैठे हुए जुल्फें न संवारा करते।


तेरी खुली~खुली सी ज़ुल्फ़ें,

इन्हें लाख तुम संवारो अगर हम

संवारते तो,कुछ और बात होती।


जब भी मुँह ढँक लेता हूँ

तेरी जुल्फों की छाँव में,

जाने कितने गीत उतर आते हैं

मेरे मन के गाँव में।


इतनी आजादी अच्छी नहीं लगती,

आपने अपनी जुल्फ़ों

को बहुत छूट दे रखी है.


Julfe Shayari

फूक मार के वो अपनी

जुल्फों को संवारती है,

लगता है जैसे हवा भी उसकी गुलाम है.


यूँ मिलकर सनम तुमसे

रोने को जी चाहता है,

तेरी जुल्फों के साए में

सोने को जी चाहता है।”


जूल्फों से यूँ चेहरे को छुपाते क्यूँ हो,

शर्माते हो तो सामने आते क्यूँ हो,

कर लो मेरी तरह इकरार तुम भी अब,

प्यार करते हो तो छुपाते क्यूँ हो।


माथे को चूम लूँ मैं और उनकी जुल्फ़े

बिखर जाये, इन लम्हों के

इंतजार में कहीं जिंदगी न गुज़र जाये।


ज़ुल्फ़ तेरी एक घनेरी शाम

की बदल है,

जो हर शाम रंगीन कर दे, ऐसी

वो तेरी आँचल है !!


चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन,

क्यों रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन।


मेरी उंगलियाँ फिर तेरी जुल्फों से

गुज़र जायें, जब तू पलकें झुकाकर

फिर मेरी ज़िन्दगी में चली आये।


इधर गेसू उधर रु-ए-मुनव्वर है तसव्वुर में,

कहाँ ये शाम आएगी कहाँ ऐसी सहर होगी।


ज़ुल्फ़ ए सरकार से

जब चेहरा निकलता होगा,

फिर भला कैसे कोई

चाँद को तकता होगा।


मैं घंटों निगाह भर

के देखता रहा उन्हें,

वो इत्मिनान से घंटों

धूप में जुल्फें सुखाती रहीं

shayari on zulfein
zulfein poetry 2 line

झटक कर ज़ुल्फ़ों को कर देती हो

पानियों को आज़ाद,

ये आदत है या रिझाने की अदा

है तुम्हारी !!


Julfe Shayari

झुकी नज़रें और ज़ुल्फ़ की घटा छाई,

बरसा है सावन और फिर उनकी याद आई !!


किसी ने पूछा कौन याद आता है,

अक्सर तन्हाई में, हमने कहा कुछ

पुराने रास्ते, खुलती ज़ुल्फे और बस दो आँखें।


कम से कम अपने बाल तो

बाँध लिया करो,

कमबख्त बेवजह मौसम

बदल दिया करते हैं।


छेड़ आती हैं

कभी लब को कभी रुक्सारों को,

तुमने जुल्फों को बहुत सर चड़ा रखा है।


पहले जुल्फ, फिर होठ, फिर दिल पे

हावी तेरे नैन हो गये, तुने चार दफा

Dp बदली हम चार

दफा तेरे फैन हो गये।


पहली मुलाकात थी,

और हम दोनों ही बेबस थे,

वो जुल्फें ना संभाल सके,

और हम खुद को.


आह को चाहिये इक

उम्र असर होते तक,

कौन जीता है

तेरी जुल्फ के सर होते तक।


कर के बेचैन मुझे

उसका भी बुरा हाल हुआ,

उसकी ज़ुल्फें भी ना

सुलझी मेरी उलझन की तरह.


मेरे मर जाने की वो सुन के खबर आई

“मोहसिन” घर से रोते हुए

वो बिन ज़ुल्फ़ सँवारे निकले।


हर खुशी माना है ,सनम तेरी

जुल्फों के साये में है, वो मज़ा मगर है

कहाँ, जो दिल के लुट जाने में।

“ज़ुल्फ़ पर शेर”


Julfe Shayari

रात की मदहोशी को तो जैसे तैसे

संभाला था मैंने,

सुबह उन्होंने ज़ुल्फ़ झटक के फिर से

बेहोश कर दिया !!


तेरी आगोश में आके,

मैं दुनिया भूल जाता हूँ,

तेरी जुल्फों के साये में,

सुकूँ की नींद पाता हूँ।


जुल्फें चाहे कितनी हंसीं क्यूँ न हो,

दुपट्टा शख़्सियत को

चार चाँद लगा देता है।


बहुत ही शरारती हैं

ये तेरी आवारा जुल्फें,

हवा का बहाना बनाकर

तेरे गालो को चूम लेती हैं.

Zulf Shayari
julfe shayari

कल मिला जो वक्त तो

जुल्फें तेरी सुलझाऊंगा,

आज उलझा हूँ

जरा मैं वक्त के सुलझाने में।


ढूंढता चला हूँ मैं गली गली बहार की,

बस इक छांव ज़ुल्फ़ की

बस इक निगाह प्यार की.


कोई हवा का झोंका,

जब तेरी जुल्फों को बिखराता है,

कसम खुदा की,

तू बड़ा ही कातिल नजर आता है।


तेरे जुल्फों के अंधियारे

में अपना शहर भूल आया,

मैं वही शख्स हूँ

जो तेरे दिल में अपना घर भूल आया।


ये कह कर सितमगर

ने ज़ुल्फ़ों को झटका,

बहुत दिन से दुनिया परेशाँ नहीं है।


फिर न सिमटेगी मोहब्बत

जो बिखर जायेगी,

ज़िंदगी ज़ुल्फ़ नहीं जो फिर संवर जायेगी।


जुल्फ़े सिर्फ “दांयी तरफ” मत रखा करो,

बांया झुमका खुद को

महफूज़ नहीं समझता।


उड़े जब-जब जुल्फें तेरी कंवारियों का

दिल मचले कंवारियों का

दिल मचले, जिन्द मेरिये ।


Zulfein Shayari


अपने हुस्न पर इतना इतराना छोड़ दो,

यह दिल पर तीर चलाना छोड़ दो,

ज़ुल्फ़ें खोल ऐसे गली में आया ना करो,

यह सब करके हमको जलाना छोड़ दो…


यह ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा,

इस रात की तक़दीर सँवर जाये तो अच्छा,

जिस तरह से थोड़ी सी ज़िन्दगी तेरे साथ कटी है,

बाकी भी उसी तरह गुज़र जाये तो अच्छा,

वैसे तो तुम्ही ने मुझे बर्बाद किया है,

इल्ज़ाम किसी और के सिर जाये तो अच्छा…


हम हुए तुम हुए कि ‘मीर’ हुए

उस की ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए


नींद उस की है दिमाग़ उस 

का है रातें उस की हैं

तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू 

पर परेशाँ हो गईं


तुम्हारी जुल्फ के साये में शाम कर लूँगा,

सफ़र इस उम्र का पल में तमाम कर लूँगा,

नज़र मिलाई तो पूछूंगा इश्क का अंजाम,

नज़र झुकाई तो खाली सलाम कर लूँगा…


Zulfein Shayari

ज़ुल्फें बिखरा के जिस दिन, 

वो सरे-बाज़ार चली

गुल मचा – शोर उठा, 

मार चली मार चली


ज़ुल्फ़ें खोल कर तुमने इनको लहराया है,

मेरे दिल पर तुमने अपना जादू चलाया है,

जबसे देखा है तुम्हें ज़ुल्फ़ें लहराते,

तेरा यह मासूम चेहरा तबसे दिल में समाया है…

julfe shayari
zulfein shayari

बरसात भी नहीं और बादल गरज रहे हैं,

सुलझी हुई हैं ज़ुल्फें और हम उलझ रहे हैं,

मदमस्त एक भँवरा क्या चाहता है कली से,

ये तुम भी समझ रहे हो हम भी समझ रहे हैं….


दिसम्बर से भी ठण्डा है, 

तेरी ज़ुल्फ़ का साया,

जी चाहता है की, 

जून तेरे पास आकर गुजारूं…


माथे को चूम लूँ मैं और,

उनकी जुल्फ़े बिखर जाये,

इन लम्हों के इंतजार में,

कहीं जिंदगी न गुज़र जाये…


बड़ी आरज़ू थी महबूब 

को बे नक़ाब देखने की

दुपट्टा जो सरका तो ज़ुल्फ़ें 

दीवार बन गयी


तेरी जुल्फों से नज़र मुझसे हटाई न गई,

नम आँखों से पलक मुझसे गिराई न गई…


काजल, आँखें, ज़ुल्फें, 

झुमके, चेहरा, बिंदिया

हाय, दिल हार गए हम 

तुझे बे-नकाब देखकर


ठान लिया था कि अब और 

शायरी नहीं लिखेंगे

पर उनको ज़ुल्फें झटकते देखा 

और अल्फ़ाज़ बग़ावत कर बैठे


रेशमी जुल्फें हैं तेरी,

मखमली है चेहरा तेरा,

हो जाऊं तुम्हारा या 

बना लूं तुम्हें अपना….


ये उड़ती ज़ुल्फें, ये बिखरी मुस्कान

एक अदा से संभलूँ, तो दूसरी 

होश उड़ा देती है


फिर न सिमटेगी मोहब्बत 

जो बिखर जायेगी,

ज़िंदगी ज़ुल्फ़ नहीं 

जो फिर संवर जायेगी…


Zulfein Shayari

माना हर खुशी सनम तेरी 

जुल्फों के साये में है,

मगर वो मज़ा है कहाँ,

जो दिल के लुट जाने में है…


जो गुजरे इश्क में सावन 

सुहाने,याद आते हैं,

तेरी जुल्फों के मुझको 

शामियाने याद आते हैं…


तेरे जुल्फों के अंधियारे में,

अपना शहर भूल आया,

मैं वही शख्स हूँ जो तेरे दिल में,

अपना घर भूल आया…


तेरी बाहों में सिर रख कर,

तुझमें खोना चाहता हूँ,

तेरी ज़ुल्फ़ों की छांव के,

नीचे सोना चाहता हूँ…


आह को चाहिये इक उम्र 

असर होते तक,

कौन जीता है तेरी जुल्फ 

के सर होते तक…


बिखरी बिखरी ज़ुल्फें तेरी, 

पसीना माथे पर है

सच तो ये है तुम गुस्से में 

और भी प्यारे लगते हो

shayari on zulfein
zulfein poetry 2 line

रुख-ए-यार पे यह जुल्फें,

यूँ फिसल रही है,

कभी दिन निकल रहा है,

कभी रात ढल रही है…


न झटको ज़ुल्फ़ से पानी 

ये मोती टूट जाएँगे

तुम्हारा कुछ न बिगड़ेगा 

मगर दिल टूट जाएँगे


रूठ कर तेरी जुल्फों से 

चाँद भी सहम गया,

दागदार तो था ही 

बादलों में भी छिप गया…


Zulfein Shayari

बहुत ही शरारती हैं 

ये तेरी आवारा जुल्फें,

हवा का बहाना बनाकर 

तेरे गालो को चूम लेती हैं…


हमारे भी संभल जायेंगे हालात

वो पहले अपनी ज़ुल्फें तो संभालें


उनके हाथों में मैंहदी लगाने 

का ये फायदा हुआ हमें

कि रात-भर चेहरे से उनके, 

ज़ुल्फें हटाते रहे हम


मुझे पसंद है उसकी 

खुली ज़ुल्फ़ों के साये,

उनकी उलझी ज़ुल्फ़ों में 

उलझा रहना चाहता हूँ…


आपकी जुल्फों में उलझे 

हुए मेरे कुछ ख्व़ाब है,

मेरे दिल के सवाल का, 

क्या आपका जबाब है?


सबा आती है तो ज़ुल्फें सँवरती है उसकी

गुलाब से चहरे का मुंह धो जाती है शबनम


चेहरे पे गिरी ज़ुल्फें, कह दो तो हटा दूँ मैं

ग़ुस्ताख़ी माफ

इक फूल तेरे बालों में कह दो तो लगा दूँ मैं

ग़ुस्ताख़ी माफ


यार जब तुम्हारी ये मासूम 

ज़ुल्फें तुम्हें सताती हैं

तब मेरी उँगलियाँ मचलती हैं 

ख्याल-ए-खताओं से


यूँ मिलकर सनम तुमसे 

रोने को जी चाहता है,

तेरी जुल्फों के साए में 

सोने को जी चाहता है…


चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को 

फैलाओ किसी दिन,

क्यों रोज़ गरजते हो 

बरस जाओ किसी दिन…


हर खुशी माना है ,सनम 

तेरी जुल्फों के साये में है,

वो मज़ा मगर है कहाँ ,

जो दिल के लुट जाने में…


Zulfein Shayari

कर के बेचैन मुझे उसका 

भी बुरा हाल हुआ।

उसकी ज़ुल्फें भी ना सुलझी 

मेरी उलझन की तरह


रौशन चेहरा भीगी ज़ुल्फें, 

दूँ किस को किस पर तरजीह

एक क़सीदा धूप का लिखूँ, एक 

ग़ज़ल बरसात के नाम

Zulf Shayari
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तेरी जुल्फें जब बिखर जाती है,

ए हसीना तू और भी हसीन हो जाती है…


तेरी आगोश में आके,

मैं दुनिया भूल जाता हूँ,

तेरी जुल्फों के साये में,

सुकून की नींद पाता हूँ…


पहली मुलाक़ात थी और हम दोनों बेबस,

वो ज़ुल्फें सँभालती रही और मै खुद को…


जुल्फ देखी है या नजरों 

ने घटा देखी है,

लुट गया जिसने भी तेरी 

ये अदा देखी है…


न झटको ज़ुल्फ़ से पानी ये 

मोती टूट जाएँगे,

तुम्हारा कुछ न बिगड़ेगा 

मगर दिल टूट जाएँगे…


तेरी जुल्फों के बिखरने का सबब है कोई,

आँख कहती है तेरे दिल में तलब है कोई…


संवारों न ऐसे अपने ज़ुल्फ़ों को,

गिरे जब तुम्हारे चेहरे पर तो,

धड़क उठता है मेरा दिल…


ये नादान आशिक क्या 

जाने मोहब्बत के सलीके,

उनके चेहरे से ज्यादा 

उनकी भीगी जुल्फ़े पसंद है…


Shayari On Zulfein


ख़ाना-ज़ाद-ए-ज़ुल्फ़ हैं, 

जंज़ीर से भागेंगे क्यों

हैं गिरफ़्तारे-वफ़ा, जिन्दां से 

घबरावेंगे क्या।~मिर्ज़ा ग़ालिब


हमने जो की थी मोहब्बत आज भी है, 

तेरी जुल्फों के साए की चाहत आज भी है,

रात कटती है आज भी खयालों में तेरे, 

दीवानों सी हालत मेरी आज भी है!


तेरी जुल्फों की तरह बिखर 

जाने को जी करता हैं,

अब मुझे प्यार मे हद से ज्यादा 

गुजर जाने को जी करता है


आंसमा पे सरकता चाँद, 

और कुछ रातें थी सुहानी,

तेरी जुल्फों से गुजरती हुई उंगलियाँ, 

और तेरी साँसे थी जैसे मीठा पानी


या दिले दीवाना रुत जागी वस्ले यार की,

झुकी हुई ज़ुल्फ़ में छाई है घटा प्यार की.


जब भी मुँह ढँक लेता हूँ

तेरी जुल्फों की छाँव में

जाने कितने गीत उतर 

आते हैं मेरे मन के गाँव में

julfe shayari
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कैदी तेरी जुल्फों का है आजाद जहां से।

मुझको रिहाई तो सजाओ ने दिलाई।


Shayari On Zulfein

गर्मी सुरज की महसुस की है 

तेरे आगोश में मैने,

बर्फ की ठंडक मिली है 

तेरी जुल्फों के मोहपाशों से


लिपट के तेरी जुल्फों में 

बादलों में खो जाना

फिर से तेरी आंखों में 

डूब के पार हो जाना


छाँव पाता है मुसाफिर तो ठहर जाता है

ज़ुल्फ़ को ऐसे न बिखरा,हमे

नींद आती है ~मुनव्वर राना


तेरी आँखों की नमकीन मस्तियां तेरी

हंसी की बेपरवाह गुस्तखीयां

तेरी जुल्फों की लहराती अंगडाईयां नहीं 

भुलूंगा मैं जब तक है जान…जब तक है जान।


बडे गुस्ताख हैं, झुक कर 

तेरा चेहरा चूम लेते हैं….

तुमने भी जानम, जालिम 

ज़ुल्फ़ों को सर चढा रखा है।


खुदखुशी करने से मुझे कोई परहेज नही है

बस शत॔ ईतनी है कि फंदा तेरी जुल्फों का हो


जिस हाथ से मैंने तेरी 

जुल्फों को छुआ था…

छुप छुप के उसी हाथ को मैं चूम रहा हूं… 

मुशीर झिंझानवी


तेरी जुल्फों की ज़ंजीर 

मिल जाती तो अच्छा था

तेरे लबों की वो लकीर 

मिल जाती तो अच्छा था


यूँ मिलकर सनम तुमसे 

रोने को जी चाहता है

तेरी जुल्फों के साए में 

सोने को जी चाहता है …


बिखरने दे तेरी खुशबू

महक जाने दे फिजाओं को,

खुलके बिखरने दे जुल्फों को,

बरस जाने दे घटाओं को

लहरा दे दुपट्टा अपना एक बार

बहक जाने दे हवाओं को


इजाजत हो तो मैं तस्दीक कर

लूँ तेरी जुल्फों से,

सुना है जिन्दगी इक खूबसूरत 

दाम है साकी। -‘अदम’


Shayari On Zulfein

तेरी जुल्फों की छाँव के भी

तजुर्बे अजब रहे,

जब-जब किया साया, 

झुलसता ही रहा हूँ…


ज़ुल्फ़ बिखरा के निकले वो घर से देखो 

बादल कहाँ आज बरसे

फिर हुईं धड़कनें तेज़ दिल की 

फिर वो गुज़रे हैं शायद इधर से


ये रात की तन्हाई और

ज़िक्र तेरी जुल्फों का ..

क्या खूब जैसे रात भी क़ैद थी 

तेरी जुल्फों के तले

zulfein shayari
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कोई हवा का झोंका जब तेरी 

जुल्फों को बिखराता है..

कसम खुदा की… तू बड़ा ही 

कातिल नजर आता है…


सूरज का यूँ अफ़क़ पे गुरूब हो

जाना तो कुछ तय सा था,

पर फिर ये तेरी जुल्फों की 

काली घटाएं क़यामत ले आई ।


हम ने जो कि थि मोहब्बत आज भी हे तेरी 

जुल्फों कि साय कि चाहत आज भी हे

रात कट्ती हे आज भी खयालों मे तेरे 

दिवानों सी वो मेरि हालत आज भी हे


Zulfein Poetry 2 Line


हाथ टूटें मैंने गर छेड़ी हों ज़ुल्फ़ें आप की,

आप के सर की क़सम बाद-ए-सबा थी मैं न था।


मेरे जुनूँ को ज़ुल्फ़ के साए से दूर रख,

रस्ते में छाँव पा के मुसाफ़िर ठहर न जाए।


जुल्फों में तेरी पेंच ओ ख़म जितने,

मेरी मजबूरियाँ मेरे मुश्किलात बस इतने…


वों जुल्फें हवाओं संग लहरायी थीं,

हम असर इश्क का समझ बैठे…


बहुत ही शरारती हैं ये तेरी आवारा जुल्फें,

हवा का बहाना बनाकर तेरे गालो को चूम लेती हैं…


देख लेते जो मेरे दिल की परेशानी को,

आप बैठे हुए ज़ुल्फ़ें न सँवारा करते…


आह को चाहिये इक उम्र असर होते तक,

कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होते तक…


पूछा जो उनसे चाँद निकलता है किस तरह,

ज़ुल्फ़ों को रूख पे डाल के झटका दिया कि यूँ…


ज़ाहिद ने मेरा हासिल-ए-ईमान नहीं देखा,

रुख पर तेरी ज़ुल्फों को परेशान नहीं देखा…


देख लेते जो मेरे दिल की परेशानी को,

आप बैठे हुए ज़ुल्फ़ें न सँवारा करते…


उन्होंने ज़ुल्फें क्या झटकी अपनी,

सारे शहर में बारिश हो गई…


Zulfein Poetry 2 Line

जिस हाथ से मैंने तेरी जुल्फों को छुआ था,

छुप छुप के उसी हाथ को मैं चूम रहा हूं…


जुल्फें तुम्हारी परेशान करती है अक्सर,

उठती है लहरें समंदर की तरह…

shayari on zulfein
zulfein poetry 2 line

देख लेते जो मेरे दिल की परेशानी को,

आप बैठे हुए ज़ुल्फ़ें न सँवारा करते।


किसी ज़ुल्फ़ के साये में हमें नींद आती थी,

अब मयस्सर किसी दीवार का साया भी नहीं…


बहते समुंदर सी तेरी ज़ुल्फ़ें जब लहराएं,

आशिकों के सीने से दिल चुरा ले जाएं…


सुन छोरे मैं जु़ल्फें खुली रखती हूं,

तेरा दिल बांधने के लिए…


बिखरी हुई ज़ुल्फ़ इशारों में कह गई,

मैं भी शरीक हूँ तेरे हाल-ए-तबाह में…


जुल्फ देखी है या नजरों ने घटा देखी है,

लुट गया जिसने भी तेरी ये अदा देखी है…


तेरी जुल्फे इशारो में कह गयी मुझे,

मैं भी शामिल थी तुझे बर्बाद करने में…


आह को चाहिये इक उम्र असर होते तक,

कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होते तक…


बिखरी हुई वो ज़ुल्फ़ इशारों में कह गई,

मैं भी शरीक हूँ तेरे हाल-ए-तबाह में।


तुझे देख दिल को लगा एक झटका है,

तेरी ज़ुल्फ़ों में जा मेरा दिल अटका है…


Zulfein Poetry 2 Line

तेरी जुल्फें जब बिखर जाती है,

ए हसीना तू और भी हसीन हो जाती है…


तेरी जुल्फे इशारो में कह गयी मुझे,

मैं भी शामिल थी तुझे बर्बाद करने में…


तेरे रूखसार पर बिखरी जुल्फों की घटा,

मैं क्या कहूँ ऐ चाँद हाय तेरी हर अदा…


फिर न सिमटेगी मोहब्बत जो बिखर जायेगी,

ज़िंदगी ज़ुल्फ़ नहीं जो फिर संवर जायेगी…


पहली मुलाकात थी, और हम दोनों ही बेबस थे,

वो जुल्फें ना संभाल सके, और हम खुद को…

Zulf Shayari
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दिसम्बर से भी ठण्डा है तेरी ज़ुल्फ़ का साया,

जी चाहता है की जून तेरे पास आकर गुजारूं


न तो दम लेती है तू और न हवा थमती है,

ज़िन्दगी ज़ुल्फ़ तेरी कोई सँवारे कैसे…


अच्छी लगती नही चांद पे बदलियां,

अपने चेहरे से जुल्फें हटा लीजिये…


तुम्हारी ज़ुल्फ़ों के साये में शाम कर लूंगा,

सफर इस उम्र का पल में तमाम कर लूंगा…


तेरी जुल्फों से नज़र मुझसे हटाई न गई,

नम आँखों से पलक मुझसे गिराई न गई…


पहली मुलाक़ात थी और हम दोनों बेबस,

वो ज़ुल्फें सँभालती रही और मै खुद को…


हवा के झोके जुल्फों को बिखरा देंगे,

इन्हें देखकर हम दुनिया भुला देंगे…


हमारे दिल की हालत गेसू-ए-महबूब जाने है,

परेशान की परेशानी को परेशान खूब जाने है…


Zulfein Poetry 2 Line

तेरी जुल्फों की ज़ंजीर मिल जाती तो अच्छा था,

तेरे लबों की वो लकीर मिल जाती तो अच्छा था…


ज़ुल्फें, सीना, नाफ़, कमर,

एक नदी में, कितने भँवर…


यूं ज़ुल्फें खोल कर न रखा कर मेरी जान,

उलझ सा जाता हूँ इनमें जब भी देखता हूँ…


गुलाबी गाल तेरे आँखों में काजल हैं,

यह खुली ज़ुल्फ़ें तेरी करती हमें पागल हैं…


मुझे पसंद है उसकी खुली ज़ुल्फ़ों के साये,

उनकी उलझी ज़ुल्फ़ों में उलझा रहना चाहता हूँ…


कर के बेचैन मुझे उसका भी बुरा हाल हुआ,

उसकी ज़ुल्फें भी ना सुलझी मेरी उलझन की तरह


तुझे देखेंगे सितारे तो ज़िया मांगेंगे,

प्यासे तेरी जुल्फों से घटा मांगेंगे…

shayari on zulfein
zulfein poetry 2 line

फूक मार के वो अपनी जुल्फों को संवारती है,

लगता है जैसे हवा भी उसकी गुलाम है…


कुछ लम्हें उसके साथ ऐसे भी बिताए थे,

उसकी ज़ुल्फ़ों में अपने हाथों से फूल लगाए थे…


ज़ुल्फें हटाते ही उनके रुख से,

चाँद हंसता है रात ढलती है…


संवारों न ऐसे अपने ज़ुल्फ़ों को,

गिरे जब तुम्हारे चेहरे पर तो 

धड़क उठता है मेरा दिल…


Zulfein Poetry 2 Line

ये उड़ी उड़ी सी रंगत ये लुटी लुटी सी जु़ल्फ़ें,

तेरी हालत बता रही है ज़िंदगी का फ़साना…


सबा आती है तो ज़ुल्फें सँवरती है उसकी,

गुलाब से चहरे का मुंह धो जाती है शबनम…


न झटको ज़ुल्फ़ से पानी ये मोती टूट जाएँगे,

तुम्हारा कुछ न बिगड़ेगा मगर दिल टूट जाएँगे…


अपनी ज़ुल्फें मेरे शानों पे बिखर जाने दो,

आज रोको ना मुझे हद से गुज़र जाने दो…


तेरी जुल्फों का वो Clip बना जाऊं,

जुल्फों से हटू तो तेरे लबो में दब जाऊं…


देख लेते जो आप मेरे दिल की परेशानी को,

बैठे हुए जुल्फें न संवारा करते…


वों जुल्फें हवाओं संग लहरायी थीं,

हम असर इश्क का समझ बैठे…


उलझा हूँ मैं तेरे ज़ुल्फ़ों के साये तले,

सुलझ जाऊंगा मैं फिर जब तू लगा लेगी मुझे गले…


फिर न सिमटेगी मोहब्बत जो बिखर जायेगी,

ज़िंदगी ज़ुल्फ़ नहीं जो फिर संवर जायेगी…


हवा के झोके जुल्फों को बिखरा देंगे,

इन्हें देखकर हम दुनिया भुला देंगे…


चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन,

क्यों रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन…

Zulf Shayari
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तेरे रूखसार पर बिखरी जुल्फों की घटा,

मैं क्या कहूँ ऐ चाँद, हाय तेरी हर अदा…


Zulfein Poetry 2 Line

तेरी जुल्फों के बिखरने का सबब है कोई,

आँख कहती है तेरे दिल में तलब है कोई…


बिजलियों ने सीख ली उनके तबस्सुम की अदा,

रंग ज़ुल्फ़ों का चुरा लाई घटा बरसात की…


हम कहाँ से अपने दिल को समझाये

आप ने यूँ जुल्फ जो बिखेरी है…


ढूंढता चला हूँ मैं गली गली बहार की,

बस इक छांव ज़ुल्फ़ की बस इक निगाह प्यार की…


जुल्फें चाहे कितनी हंसीं क्यूँ न हो,

दुपट्टा शख़्सियत को चार चाँद लगा देता है


इतनी आजादी अच्छी नहीं लगती,

आपने अपनी जुल्फ़ों को बहुत छूट दे रखी है…


खुदखुशी करने से मुझे कोई परहेज नही है,

बस शत॔ इतनी है कि फंदा तेरी जुल्फों का हो…


फिर न सिमटेगी मोहब्बत जो बिखर जायेगी,

ज़िंदगी ज़ुल्फ़ नहीं जो फिर संवर जायेगी…


चली आओ खिड़की पर जुल्फें संवारते हुए,

ताकि शाम आज की कुछ तो हसीन बने…


Zulfein Poetry 2 Line

मेरे होठ जब तेरे होठों के पास आते है,

कमबख्त ये जुल्फ़ दीवार बन जाते हैं…

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