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| Khuda Aur Mohabbat Shayari |
Creators have always been interested in God and God, poets and creators question its existence, some moments of creation also come when creation itself starts becoming proof of God, God se Raaz-o-Niyaz means There is a different form of mystery talk and prayer, friends, famous poets have written poetry on God in different ways. Which will be liked very much by the connoisseurs of Sher-o-Shayari. You can easily express your feelings through these poems.
So that's why dear friends in today's new post we have Khuda Shayari,Khuda Shayari In Hindi,Khuda Aur Mohabbat Shayari,Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari,Shayari On Khuda,khud ko kar buland itna shayari,Khuda Shayari By Ghalib,Khuda Ki Shayari is presenting in a special way. So come friends, today we start reading these poems written on the mercy of God.
Khuda Shayari
हमें इस चिस्त से उम्मीद क्या थी और क्या निकला,
कहाँ जाना हुआ था तय कहाँ से रास्ता निकला,
खुदा जिनको समझते थे वो शीशा थे न पत्थर थे,
जिसे पत्थर समझते थे वही अपना खुदा निकला।
अँधेरी रात की कोख से सूरज निकालता कौन है
डूबने वालों को मँझधार में सदा संभालता कौन है..
उस के बन्दों को जब डुबाती है लहरें हालात की
समंदर को हुक्म दे कर उन्हें उछालता कौन है..
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| Khuda Shayari In Hindi |
मेरा खुदा तो मेरे सामने हैं
हर इंसान में उसका अंश हैं..
जरूरत क्या हैं उसे ढूंढने की
कुदरत में खुदा खुद बसा हैं..
खुदा से प्यारा कोई नाम नहीं होता,
उसकी इबादत से बड़ा कोई काम नहीं होता,
दुनिया की मोहब्बत में है रुसवाईयां बड़ी,
पर उसकी मोहब्बत में कोई बदनाम नहीं होता।
Khuda Shayari
हैरान हूँ तेरा इबादत
में झुका सर देखकर,
ऐसा भी क्या हुआ जो
खुदा याद आ गया।
खुदा की हो रहमत तो मिल जाए मकाम..
मौला ही है मेरी इब्तिदा, मौला ही अंजाम..
इब्तिदा : आरंभ, शुरुआत
हर ज़र्रा चमकता है
अनवर-ए-इलाही से,
हर सांस ये कहती है
हम हैं तो खुदा भी है।
जिंदगी की सारी ख्वाहिशें
तुझसे है, मेरे खुदा..
लाखों बार करता हूं
मैं तेरा शुक्रिया अदा..
मुझे भी बना दे ऐ खुदा -दिल तोड़ने वाला,
कब-तक वफा करूँगा
बेवफाओ के शहर मे।
अपनी रहमतों से मेरे ऐब छुपाने वाला
मुझे हर परेशानी से है वो बचाने वाला..
मुख़ालीफ लहरों में डूबने नहीं देता मुझे
मेरे लबों पर ज़िक्र अपना सजाने वाला..
हालात जमाने के
जब भी होते मुश्किल..
मेरे मौला तुझे ही याद
करते रहता मेरा दिल..
Khuda Shayari
मुझे खुदा के इन्साफ पर
उस दिन यकीन हो गया,
जब मैंने अमीर और गरीब
का एक जैसा कफ़न देखा।
सुनकर ज़माने की बातें
तू अपनी अदा मत बदल
यकीं रख अपने खुदा पर
यूँ बार बार खुदा मत बदल।
तेरा करम तो आम है
दुनिया के वास्ते,
मैं कितना ले सका
ये मुकद्दर की बात है।
इंसानियत की गिरा कर दीवार
इंसान से इंसान हुआ है जुदा..
डूबती इंसानियत की इस नैय्या को
अपनी रहमत से पार लगा दे खुदा..
खुदा से मोहब्बत करने वाला
खुद उसका अंश बन जाता हैं..
मज़ार पर बैठे फकीर में भी
वो खुदा को देख पाता हैं..
एक मुद्दत के बाद
हमने ये जाना ऐ खुदा,
इश्क तेरी ज़ात से सच्चा है
बाकी सब अफ़साने।
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| Khuda Aur Mohabbat Shayari |
Khuda Shayari
कर लेता हूँ बर्दाश्त तेरा हर
दर्द इसी आस के साथ,
की खुदा नूर भी बरसाता है,
आज़माइशों के बाद।
हवा खिलाफ थी लेकिन
चिराग भी खूब जला,
खुदा भी अपने होने का
क्या क्या सबूत देता है।
वो पहले सा कहीं,
मुझको कोई मंज़र नहीं लगता,
यहाँ लोगों को देखो,
अब ख़ुदा का डर नहीं लगता।
गरूर करने वालों से क़यादत छीन लेता है
बिन माँगे ही, वो ज़रूरत से सिवा देता है..
हादसे नहीं करते कभी रुख उस चौखट का
जिस घर में ज़िक्र खुदा का सदा रहता है..
मोहब्बत कर सकते हो
तो खुदा से करो,
मिटटी के खिलौनों से
कभी वफ़ा नहीं मिलती।
दुनिया से दिल लगाकर दुनिया से क्या मिलेगा,
याद-ए-खुदा किये जा तुझ को खुदा मिलेगा,
दौलत हो या हुकूमत ताक़त हो या जवानी,
हर चीज़ मिटने वाली हर चीज़ आनी जानी।
Khuda Shayari
मोहब्बत की आजमाइश दे दे कर,
थक गया हूँ ऐ खुदा,
किस्मत मे कोई ऐसा लिख दे,
जो मौत तक वफा करे।
बदल दे मेरे हालात कहता है ज़माना करीम तुझे
बख्श दे मेरी ख़ताएँ कहता है ज़माना रहीम तुझे..
सरापा खतावार हुँ मैं, उठते नहीं है हाथ दुआ को
सुन ले मेरी सदा कहता है ज़माना अलीम तुझे..
न था तो खुदा था न
होता तो खुदा होता,
डुबोया मुझको होने मैं
न होता तो क्या होता।
सलीक़ा ही नहीं शायद
उसे महसूस करने का,
जो कहता है ख़ुदा है
तो नज़र आना ज़रूरी है।
ढूंढता हूं मैं तुझे हर जगह
मगर मिलता ही नहीं हैं..
खुदा तू छिपा कहा हैं
ढूंढू फिर भी मिलता नहीं हैं..
Khuda Shayari
तेरे आजाद बन्दों की
न ये दुनिया न वो दुनिया,
यहाँ मरने की पाबन्दी,
वहाँ जीने की पाबन्दी।
वो पहले सा कहीं मुझको
कोई मंज़र नहीं लगता,
यहाँ लोगों को देखो अब
खुदा का डर नहीं लगता।
मिट जाए गुनाहों का
तसवुर ही जहाँ से,
अगर हो जाये यकीन
के खुदा देख रहा है।
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| Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari |
तेरी रहमतों के साए में
हम इंसान मचलते रहे..
इस चमकते आफताब की तरह
उधर डूबते रहे, इधर निकलते रहे..
Khuda Shayari In Hindi
जब आन पड़ी मुश्किलें नाम तेरा लेते रहे
मुसीबतें हटती गई, हम वास्ता तेरा देते रहे..
जब फेंके गए इलज़ाम के पत्थर हम पर
"खुदा सब जानता है" बस यही कहते रहे..
दिल से पढूं अगर मैं कुरान
तो तेरी खुदाई समझती है..
इंसानियत के दुश्मनों की कोई
तरकीब फिर कहाँ चलती है...
सारी कायनात पर तेरी हुक्मरानी चलती है
तेरे ही हुक्म से रातें करवट बदलती है..
जो गुज़ार देते है उम्र अपनी तेरी राह में
देख कर उन्हें मुश्किलें, रास्ता बदलती है..
दर बदर भटकने वाले पाते है पनाह तेरे दरबार में
नहीं कोई अदना आला, उस मुक़द्दस सरकार में..
जहा बरसती है नूर की घटा हर घडी शबाना रोज़
मुझ फ़क़ीर का हो क़याम चंद रोज़ उस दियार में..
Khuda Aur Mohabbat Shayari
तेरी राह में बसर हो मेरी ये ज़िन्दगी
तेरे करम की है मोहताज हर ख़ुशी..
भरते है जो औरों की ज़िंदगी में रंग
उन ही की तक़्दीरों में लिखता है वो बुलंदी..
मुसीबतों में ढाँप लिया उस की रहमतों ने
हमें क़यामत में बचा लिया उनके अश्कों ने..
दमे आखिर यही सोच कर अफ़सोस करता रहा
सजदे में झुकने ना दिया कभी ज़रूरतों ने..
वो खुदा को कैसे देख लेते
जो आदमियत ना समझ पाएं..
खुदा कैसे मिल जाता उन्हें
जो उसके बंदे ना बन पाएं..
मानता हूं मैं जिंदगी का मखदूम अपना..
या खुदा तेरे बिन ग़मगीन है हर सपना..
मखदूम : ख़िदमत के योग्य, पूजनीय
जब कभी नाम मौला का लबों पर आ जाएगा
ग़म हो कितना ही गहरा, मुँह छुपाए चला जाएगा..
जो आ जाए कभी जोश में रहमत उस की
लाख हो कोई रुसवा मगर ज़माने पर छा जाएगा..
वो माँगने से पहले ही झोलीया भर देता है
दूर हर परेशानी को, राहों से कर देता है..
मिटा कर देखो कभी खुद को उस राह में
कभी ना जो ख़त्म हो ऐसा वो समर देता है..
उसके बिना दिल को
मेरे ना कोई चाह है..
मेरा मसीहा, मेरा
साथी, बस अल्लाह है..
Khuda Aur Mohabbat Shayari
कायनात का ज़र्रा ज़र्रा लेता है नाम तेरा
बन्दों की मुसीबत टाल देना है काम तेरा..
उसी के हुक्म से है गर्दिशें सितारों की
खलकत को है काफी सिर्फ पैगाम तेरा..
तेरे नाम से जागू, तेरे नाम से सोया करूँ
अश्कों से मैं गुनाहों को अपने धोया करूँ..
इंसानियत का ऐसा दर्द अता कर मुझे मौला
जो देखू किसी को तड़पता तो पहरों रोया करुँ..
उस के नामलेवा ज़माने में परेशान नहीं होते
उस की हम्द पढ़ने वाले दिल वीरान नहीं होते..
ज़माने ने चाहा सदा मिटाना तेरे परस्तारों को
इस निशानी के संग कभी बेनिशाँ नहीं होते..
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| Shayari On Khuda |
जिंदगी भर चमकती रहे
यूं ही हमारी किस्मत..
हम पर यूं ही बनी रहे
उस आका की रहमत..
तू है कादिर, हम ने शान तेरी निराली देखी
पल भर में बदहाली की जगह खुशहाली देखी..
गुनाहगारों को देता है पनाह अपनी बारगाह में
हम ने जोश में आते अकसर उसकी खुदाई देखी..
Khuda Aur Mohabbat Shayari
ए खुदा खुशियां मेरी
झोली में भले ही ना दे..
मेरे महबूब के मगर कभी
आंखों में आंसू ना दे..
खुशियां दी है हमेशा,
दर्द को किया है जुदा..
करता हूं हमेशा आपकी
इबादत, या मेरे खुदा..
तेरी हम्द बयाँ करते करते मेरी उम्र बीत जाए
जाऊँ मैं बैतुल्लाह, खुदा करे वो दिन भी आए..
तेरी रहमतों को कब गवारा हाथ फैलाए कही हम
हो तेरा करम जो खुदाया मुसीबतें भी नज़र चुराए..
ज़माने में बुलंद होती अल्लाहु अकबर की सदाएँ
मेरी ज़िन्दगी में भी खैर से कभी वो दिन आए..
चल कर सर के बल अकीदत की ज़मीन पर
किसी रोज़ हम रूसिया भी तैबा नगरी को जाए..
Khuda Aur Mohabbat Shayari
उसी के हुक्म से चलता है कायनात का निज़ाम
करता है रौशन राहे ज़माने की उस का पयाम..
वो बख्श देता है सरापा गुनाहगारों को भी
जब्बार है वो, रहीम है उसी का एक नाम..
एक दुआ इस गरीब की
कर ले ख़ुदा तू कुबूल..
तुझे ही मानता हूं मैं
मसीहा, तू ही है रसूल..
नाम तेरा, मेरा हर ग़म टाल देता है
ज़िक्र तेरा मुश्किलों में रास्ता निकाल देता है..
मेरे मौला, करूँ कैसे शुक्र मैं तेरा अदा
जो डूबता हूँ तो सागर उछाल देता है..
जिंदगी में अल्लाह की इबादत
बिना कोई काम ना हो..
खुदा के सिवा मेरे लबों पर
और कोई नाम ना हो..
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| khud ko kar buland itna shayari |
फकत नाम है काफी तेरा मेरी ज़िंदगी के लिए
तेरा करम हो और क्या चाहिए आदमी के लिए..
जब कभी मुँह मोड़ा किसी ने तेरी बारगाह से
फिर मुद्दतों भटका किया वो ख़ुशी के लिए..
Khuda Aur Mohabbat Shayari
ये कैसा मायाजाल, है इश्क का
जिसमे हर बंदा, कफन में लिपटा है !
ये कैसी मोहब्बत है, ए खुदा
जिस्से तू भी न बचा पाया है!!
Khuda Aur Mohabbat Shayari
अभी मायूस मत होना तू..,अभी ये बीमार ज़िंदा है
अभी आँखों की शमाएं जल रही हैं, प्यार जिंदा है
हजारों जख्म खाकर भी मैं दुश्मन के मुक़ाबिल हूँ
खुदा का शुक्र है, अब तक दिल ए खुद्दार, जिंदा है
आशिक़ सौदागरी और मजबूरी
के दायरे से निकल कर इश्क़ करता है तो इश्क़
आशिक़ को खुद सलामी देने आता है।।
पूछते है सभी मुझसे केे मोहब्बत आखिर है क्या
हम ने भी कहे दिया केे मोहब्बत वो ऐसा शिर्क है
जो इंसान करता भी खु़दा से है और मांगता भी खु़दा से है...
दामन को फैलाए बैठे है
अल्फाज़ - ए - दुआ कुछ याद नहीं...
मांगू तो अब क्या मांगू खुदा
जब उनके सिवा कुछ याद नहीं...
सोने से पहले ओर उठने के बाद
तेरा ही ख्याल दिल में रहता है
खुदा भी कहने लगा अब तो
मोहब्बत मुझसे मांगता है
दिल में तो तेरे हर वक़्त वो रहता है।।
Khuda Aur Mohabbat Shayari
ख़ुदा से मांगोगे सच्चे दिल से तो
हर एक चीज़ को पा लोगे
मोहब्बत की कमी ना रहेगी ज़िन्दगी में
जब उस खुदा को यार बना लोगे।।
मुझसे दो लोगों ने मोहब्बत की है
एक वो जिसकी मैं हो ना सकी
और दूसरा जो मेरा ना रह सका।।
खुदा तो इक तरफ..
खुद से भी कोसों दूर होता है
इंसान जिस वक्त..
ताकत के नशे में चूर होता है...
अपना दिल उसके कदमों में धर के तो देखो
खुदा से मोहब्बत करके तो देखो
कभी ना मिलेगा गम इस इश्क़ में
एक बार उस खुदा के बनकर तो देखो।।
मोहब्बत करनी है तो खुदा से करो
कभी इस मोहब्बत में धोखा नहीं खाओगे
इंसानों में ढूंढते फिर रहे हो वफ़ा तुम
यहाँ तो हर रोज़ तुम टूटते जाओगे।।
मांगने से मिलता अगर सच्चा प्यार तो
हम मांगने की सारी हद्दे पार कर देते
तुझे देते हम थोड़ा कम वक्त
पूरा दिन खुदा के नाम कर देते।।
Khuda Aur Mohabbat Shayari
कुछ रिश्ते जन्म से होते हैं
कुछ को खुदा यहां बनाता है
जिन्हें हम जानते तक नहीं
खुदा उनसे हमें मिलाता है।।
खरीद पाउँ खुशियाँ उदास
चेहरों के लिए,
मेरे किरदार का मोल इतना कर दे खुदा।
मोहब्बत में हमने पहले खुद को
और फिर खुदा को भुलाया
इसलिए शायद बिछड़ गए हम
खुदा की जगह हमने तुझे रब्ब बनाया।।
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| Khuda Shayari By Ghalib |
आखिर ये इतनी उलझने क्यों हैं,
मोहब्बत अगर ज़िंदगी है...,तो इसमें कसमें क्यों हैं,
_कोई बताता क्यों नहीं हमे ये राज की
धड़कन अगर अपनी है...,तो किसी और के बस में क्यों है।
Khuda Aur Mohabbat Shayari
प्यार बस तुम्ही से करते है पर बताते नही
चाहत तुझे पाने की है पर कभी जताते नही,
बस तुम खुश रहो ये दुआ करता हू खुदा से
इसीलिए हम अपने गम किसी को दिखाते नही..
इस जहां में हमारा मेल
मुमकिन नहीं लेकिन
उस जहां में मैं सिर्फ तुम्हारा
साथ मांगूंगी अपने मालिक से।।
अचानक से एक लड़की
हमारी ज़िंदगी में चली आयी है
शायद खुदा ने ही हमारी
यह खूबसूरत जोड़ी बनाई है।।
खुदा को याद कर हर वक़्त
उसके आगे सर झुकाते हैं
हम तुझे पाने के लिए उसके आगे
हर रोज़ हाथ फैलाते हैं।।
इतना नाम खुदा का लेते तो
शायद वो भी मिल जाता हमें
जितना याद हमने तुझे किया है।।
Khuda Aur Mohabbat Shayari
असी नाज़ुक दिल दे लोग हां
साडा दिल ना यार दुखाया कर
ना झूठे वादे करया कर
ना झूठियां कसमां खाया कर
तेनु किन्नी वारी आखेया ए
मेनू वल वल ना आज़माया कर
तेरी याद दे विच मैं मर जासां
मेनू ऐना याद ना आया कर।।
चाह कर भी हम एक
नहीं हो सकते
शायद खुदा ने हमारा
इतना ही साथ लिखा था।।
वादा-ए-वफ़ा करो तो
फिर खुद को फ़ना करो,
वरना खुदा के लिए
किसी की ज़िंदगी ना तबाह करो
खुदा ने मोहब्बत का यह
खूबसूरत रिश्ता बनाया
शुक्रगुजार हैं हम खुदा के
जिसने हमें तुझसे मिलाया।।
Khuda Aur Mohabbat Shayari
लोग दिल मैं अपनी
मोहब्बत को बसाए बैठे है
इसलिए शायद खुदा से
दूरियां बनाए बैठे है
खुदा से पहले यार को
हम सजदा करने लगे थे
खुदा को भुला कर हम
तुझपर ज्यादा मरने लगे थे।।
मोहब्बत इंसान को
भिखारी बना देती है
यह बादशाह-ए-सल्तनत तो
कुछ गिने चुने लोगों के हिस्से में आती है।।
उस खुदा के आगे दुआ में
हमने हर बार तुम्हें मांगा है
तुझे पाने के लिए अपने सारे
ख्वाबों को सूली पर टांगा है।।
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| Khuda Ki Shayari |
नाम लेकर खुदा का
दिन की शुरुआत करते हैं
नहीं किया किसीसे इश्क़
हम खुदा से मोहब्बत करते हैं।।
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
न था कुछ तो ख़ुदा था
कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने
न होता मैं तो क्या होता
हुआ जब ग़म से यूँ बे-हिस तो
ग़म क्या सर के कटने का
न होता गर जुदा तन से तो
ज़ानू पर धरा होता
ना था कुछ तो ख़ुदा था
कुछ ना होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझको होने ने
ना होता मैं तो क्या होता
था ज़िन्दगी में मर्ग का
खटका लगा हुआ
उड़ने से पेश्तर भी
मेरा रंग ज़र्द था
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर
गया पर याद आता है
वो हर इक बात पर कहना
कि यूँ होता तो क्या होता
हज़ारों साल नर्गिस
अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है
चमन में दीदा-वर पैदा
मेहरबान हो के बुला लो
मुझे चाहे जिस वक़्त
मैं गया वक़्त नहीं हूँ
के फिर आ भी ना सकूँ
कोई दिक्कत नहीं है अगर
तुम्हें उलझा सा लगता हूं
मैं पहली मर्तबा मिलने
में सबको ऐसा लगता हूं
हुआ जब गम से यूँ बेहिश
तो गम क्या सर के कटने का
ना होता गर जुदा तन से
तो जहानु पर धरा होता
कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा
ग़ालिब और कहाँ वाइज़
पर इतना जानते हैं कल वो
जाता था कि हम निकले
क्या ख़बर कौन था वो,
और मेरा क्या लगता था
जिससे मिलकर मुझे,
हर शख़्स बुरा लगता था
ये रश्क है कि वो होता है
हमसुख़न हमसे
वरना ख़ौफ़-ए-बदामोज़ी-ए-अदू क्या है
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
हुई मुद्दत कि ग़ालिब मर गया
पर याद आता है
वो हर इक बात पर कहना
कि यूँ होता तो क्या होता
बाज़ीचा-ए-अतफल है
दुनियां मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़
तमाशा मेरे आगे
वो चीज़ जिसके लिये
हमको हो बहिश्त अज़ीज़
सिवाए बादा-ए-गुल्फ़ाम-ए-मुश्कबू क्या है
बना कर फ़क़ीरों का हम भेस ग़ालिब
तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं
मेरे आँसू नही थम रहे कि
वो मुझसे जुदा हो गया
और तुम कह रहे हो कि छोड़ो
अब ऐसा भी क्या हो गया
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| Khuda Shayari In Hindi |
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है
बना है शह का मुसाहिब फिरे है इतराता
वगर्ना शहर में ग़ालिब की आबरू क्या है
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
तुम ना आए तो क्या सहर ना हुई
हाँ मगर चैन से बसर ना हुई
मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर ना हुई
मुद्दतें गुज़र गयी 'हिसाब'
नहीं किया
न जाने अब किसके
कितने रह गए हम
ये हम जो हिज्र में दीवार-ओ-दर
को देखते हैं
कभी सबा को कभी
नामाबर को देखते हैं
नवेद-ए-अम्न है बेदाद-ए-दोस्त जाँ के लिए
रही न तर्ज़-ए-सितम
कोई आसमाँ के लिए
चंद तस्वीर-ए-बूतान
चंद हसीनो के ख़ुतूत
बाद मरने के मेरे घर से
ये सामान निकला
ग़ालिब बुरा ना मान
जो वाइज़ बुरा कहे
ऐसा भी कोई है की
सब अच्छा कहे जिसे
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
ग़ुरूर-ए-लुत्फ़-ए-साक़ी
नश्शा-ए-बे-बाकी-ए-मस्ताँ
नम-ए-दामान-ए-इस्याँ है
तरावत मौज-ए-कौसर की
दिल लगा कर लग गया
उन को भी तन्हा बैठना
बारे अपनी बेकसी की
हम ने पाई दाद याँ
कोई मेरे दिल से पूछे तिरे
तीर-ए-नीम-कश को
ये ख़लिश कहाँ से होती
जो जिगर के पार होता
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| Khuda Aur Mohabbat Shayari |
हर एक बात पे कहते हो तुम कि
तू क्या है तुम्हीं कहो कि
ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है
न शोले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा
जब हुआ ग़म से यूँ बेहिस
तो ग़म क्या सर के कटने का
न होता गर जुदा तन से
तो ज़ानू पे धरा होता
निकलना ख़ुल्द से आदम
का सुनते आए हैं लेकिन
बहुत बे-आबरू हो कर
तिरे कूचे से हम निकले
तेरे ज़वाहिरे तर्फ़े कुल
को क्या देखें
हम औजे तले लाल-ओ-गुहर
को देखते हैं
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
बिजली इक कौंध गयी
आँखों के आगे तो क्या
बात करते कि मैं लब
तश्न-ए-तक़रीर भी था
दिल-ए-नादान तुझे
हुआ क्या है
आखिर इस दर्द की
दवा क्या है
रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद
नहीं हो ग़ालिब
कहते हैं अगले ज़माने
में कोई मीर भी था
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के
वो आए घर में हमारे
खुदा की क़ुदरत हैं
कभी हम उनको कभी
अपने घर को देखते हैं
होगा कोई ऐसा भी के
ग़ालिब को ना जाने
शायर तो वो अच्छा है
पर बदनाम बहुत है
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
हर एक बात पे कहते हो तुम
के तू क्या है
तुम ही कहो के ये
अंदाज़-ए-गुफ्तगू क्या है
रगों में दौड़ते फिरने के
हम नहीं कायल
जब आँख ही से ना टपका
तो फिर लहू क्या है
ज़िन्दगी अपनी जब
शक़ल से गुज़री ग़ालिब
हम भी क्या याद करेंगे
के खुदा रखते थे
अजब नशात से जल्लाद
के चले हैं हम आगे
कि अपने साए से सर
पाँव से है दो क़दम आगे
रही ना ताक़त-ए-गुफ़्तार
और अगर हो भी
तो किस उम्मीद पे कहिये
के आरज़ू क्या है
दर्द मिन्नत काश-ए-दवा ना हुआ
मैं ना अच्छा हुआ
ना बुरा हुआ
हुई मुद्दत के ग़ालिब मर गया
पर याद आता है,
वो हर इक बात पर कहना
के यूँ होता तो क्या होता।
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| Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari |
कोई उम्मीद बर नहीं आती
कोई सूरत नज़र नहीं आती
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
तुम सलामत रहो हज़ार बरस
हर बरस के दिन हो पचास हज़ार
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़
जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं
जिस काफ़िर पे दम निकले
न था कुछ तो ख़ुदा था
कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने
न होता मैं तो क्या होता
आह को चाहिए इक
उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी
ज़ुल्फ़ के सर होते तक
हर एक बात पे कहते हो तुम कि 'तू क्या है'
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है
न शो'ले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये
पियूँ शराब अगर ख़ुम भी देख लूँ दो चार
ये शीशा-ओ-क़दह-ओ-कूज़ा-ओ-सुबू क्या है
नज़र लगे ना कहीं उसके
दस्त-ओ-बाज़ू को
ये लोग क्यूँ मेरे
ज़ख़्म-इ-जिगर को देखते हैं
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
ये मसैल-ए-तसव्वुफ़
ये तेरा बयान ग़ालिब
तुझे हम वली समझते
जो ना बड़ा खवर होता
हमको मालूम है जन्नत
की हक़ीक़त लेकिन
दिल के खुश रखने को ‘ग़ालिब’
ये ख़्याल अच्छा है
रोने से और इश्क़ में
बेबाक हो गए
धोए गए हम इतने के
बस पास हो गए
हुआ जब ग़म से यूँ बे-हिस
तो ग़म क्या सर के कटने का
न होता गर जुदा तन से
तो ज़ानू पर धरा होता
दिल से तेरी निगाह
जिगर तक उतर गई
दोनों को इक अदा
में रज़ामंद कर गई
वाइज़ तेरी दुआओं में असर हो
तो मस्जिद को हिलाके देख
नहीं तो दो घूंट पी और
मस्जिद को हिलता देख
आशिक़ हूँ पर माशूक़
फरेबी है मेरा काम
मजनू को बुरा कहती है
लैला मेरे आगे
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी
कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान
लेकिन फिर भी कम निकले
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| Shayari On Khuda |
हुई मुद्दत कि ‘ग़ालिब’ मर गया
पर याद आता है
वो हर इक बात पर कहना कि
यूँ होता तो क्या होता
तेरे वादे पर जिये हम
तो यह जान झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर ना जाते
अगर एतबार होता
दर्द जब दिल में हो
तो दवा कीजिए
दिल ही जब दर्द हो
तो क्या कीजिए
इशरत-ए-क़तरा है
दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है
दवा हो जाना
हाथों की लकीरों पे मत
जा ऐ गालिब
नसीब उनके भी होते हैं
जिनके हाथ नहीं होते
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
ये न थी हमारी क़िस्मत के विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इन्तज़ार होता
तेरे वादे पर जिये हम तो ये जान झूठ
चिपक रहा है बदन
पर लहू से पैराहन
हमारी ज़ेब को अब
हाजत-ए-रफ़ू क्या है
क़र्ज़ की पीते थे मय
लेकिन समझते थे कि हां
रंग लावेगी हमारी
फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन
जाते हुए कहते हो
क़यामत को मिलेंगे
क्या खूब क़यामत का है
गोया कोई दिन और
मै से ग़रज़ नशात है
किस रूसियाह को
इक गुनाह बेखुदी
मुझे दिन रात चाहिए
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है
ये वो आतिश ग़ालिब
की लगाए ना लगे और
बुझाए ना बुझे
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
मैं भी मुँह में जुबां रखता हूँ
काश पूछो की मुद्दा क्या है
उनके देखे से जो आ जाती है
मुँह पर रौनक
वो समझते हैं की बीमार का
हाल अच्छा है
क़सीद के आते आते खत
इक और लिख रखूं
मैं जानता हूँ जो
वो लिखेंगे जवाब में
काबा किस मुँह से
जाओगे ग़ालिब
शरम तुमको मगर
नहीं आती
हैं और भी दुनिया में
सुख़नवर बहुत अच्छे
कहते हैं कि ग़ालिब का है
अंदाज़-ए-बयाँ और
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| khud ko kar buland itna shayari |
कितना ख़ौफ होता है
शाम के अंधेरों में
पूछ उन परिंदों से
जिनके घर नहीं होते
Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari
ये न थी हमारी क़िस्मत
कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते
यही इंतेज़ार होता
इश्क़ मुझको नहीं वेह्शत ही सही
मेरी वेह्शत तेरी शोहरत ही सही
बक रहा हूँ जूनून में क्या क्या कुछ
कुछ ना समझे खुदा करे कोई
ग़ालिब छूटी शराब पर
अब भी कभी कभी
पीता हूँ रोज़-ए-अब्र और
शब्-ए-मेहताब में
Shayari On Khuda
खुदा की मोहब्बत का,
अंदाज़ भी कमाल का है,
सब कुछ दे कर भी कहता है,
” है कोई मांगने वाला “
मोहब्बत कर सकते
हो तो खुदा से करो,
मिटटी के खिलौनों से
कभी वफ़ा नहीं मिलती।
बंदगी हम ने छोड़ दी है ‘फ़राज़’
क्या करें लोग जब ख़ुदा हो जाएँ
हे भगवान प्लीज मेरे
दुश्मनों को मेरी सफलता,
देखने के लिए लंबी उम्र देना।
Shayari On Khuda
हर शख़्स बन गया है ख़ुदा,
तेरे शहर में
किस किस के दर
पे माँगीं दुआ तेरे शहर में
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| Khuda Shayari By Ghalib |
खुदा का शुक्र है की,
ख्वाब बना दिये,
वरना तुम्हे देखने की तो,
हसरत ही रह जाती।
आय खुदा!
मेरा हौसला सलामत रखना,
उसकी मोहब्बत ने मेरा
ज़ब्त आज़माया है।
ज़माना ख़ुदा को ख़ुदा जानता है
यही जानता है तो क्या जानता है
ज़िंदगी अपनी जब इस
शक्ल से गुज़री ‘ग़ालिब’
हम भी क्या याद करेंगे
कि ख़ुदा रखते थे
खूदा करे वो मोहब्बत
जो तेरे नाम से है,
हजार साल गुजरने पे
भी जवान ही रहे।
Shayari On Khuda
हवा खिलाफ थी लेकिन
चिराग भी खूब जला,
खुदा भी अपने होने का
क्या क्या सबूत देता है।
अब तो जाते हैं बुत-कदे से ‘मीर’
फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया
खुदा करे के मोहब्बत मे,
वो मकाम आये,
मेरे लबो पे हमेशा सनम,
आपका ही नाम आये।
सर-ए-महशर यही
पूछूँगा ख़ुदा से पहले
तूने रोका भी था
बंदे को ख़ता से पहले
न मंदिर में सनम होते
न मस्जिद में ख़ुदा होता
हमीं से ये तमाशा है
न हम होते तो क्या होता
खुदा की इनायत है,
जो हमे मिलया है,
मगर हम अब तक साथ है
ये मोहब्बत है, हमारी।
Shayari On Khuda
हम ख़ुदा के कभी क़ाइल ही न थे
उन को देखा तो ख़ुदा याद आया
उतार इन में कोई
अपनी रौशनी या रब
कि लोग थक गए
ज़ुल्मत से अब बहलते हुए
बस एक बार निकाल
दो इस इश्क से ऐ खुदा,
फिर जब तक जियेंगे
कोई खता न करेंगे।
बच्चा बोला देख कर
मस्जिद आली-शान
अल्लाह तेरे एक को
इतना बड़ा मकान
मिट जाए गुनाहों का
तसव्वुर ही जहाँ से,
अगर हो जाये यकीन
के खुदा देख रहा है।
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| Khuda Ki Shayari |
Shayari On Khuda
पुकारता रहा किस
किस को डूबने वाला
ख़ुदा थे इतने मगर
कोई आड़े आ न गया
मजा चख लेने दो उसे गैरो की,
मोहब्बत का भी,
इतनी चाहत के बाद जो मेरा न हुआ,
तो खुदा वो ओरो का क्या होगा।
ऐ आसमान तेरे ख़ुदा
का नहीं है ख़ौफ़
डरते हैं ऐ ज़मीन तिरे
आदमी से हम
ख़ुदी को कर बुलंद इतना
कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता
तेरी रज़ा क्या है
कश्तियाँ सब की किनारे
पे पहुँच जाती हैं
ना-ख़ुदा जिन का नहीं
उन का ख़ुदा होता है
ग़म मुझे, हसरत मुझे,
वहशत मुझे, सौदा मुझे,
एक दिल दे कर ख़ुदा ने,
दे दिया क्या क्या मुझे
Shayari On Khuda
न था कोई हमारा न
हम किसी के हैं,
बस एक खुदा है और
हम उसी के हैं।
नजर नमाज नजरिया सब कुछ बदल गया,
एक रोज इश्क हुआ और,
मेरा खुदा बदल गया।
अजीब खुदा है इश्क़ का,
बिना मांगे ‘ प्यार पकड़ा देता है,
और फिर मांगने से यार भी नहीं देता।
आसमाँ पे है ख़ुदा और ज़मीं पे हम
आज कल वो इस तरफ़ देखता है कम
खुदा भी ना जाने,
कितने प्यारे रिश्तें बना देता है,
जिनको हम जानते तक नहीं उनको भी,
जान से प्यारा बना देता है!!
खुदा तूने तो लाखों की
तकदीर संवारी है,
मुझे तसल्ली तो दे के
अब मेरी बारी है।
Shayari On Khuda
सामने है जो उसे लोग
बुरा कहते हैं
जिस को देखा ही नहीं
उस को ख़ुदा कहते हैं
साजिश उस खुदा की
देखो तो जरा,
हमे खुश देखकर
मोहब्बत में फंसा दिया!!
ख़ुदा के हाथ में मत
सौंप सारे कामों को
बदलते वक़्त पे कुछ
अपना इख़्तियार भी रख
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| Khuda Shayari In Hindi |
खुदा को भूल गए लोग फ़िक्र – ए – रोजी में,
तलाश रिजक की है राजिक का ख्याल नहीं।
ख़ुदा हम को
ऐसी ख़ुदाई न दे
कि अपने सिवा
कुछ दिखाई न दे
कैसी चली है अब के
हवा तेरे शहर में
बंदे भी हो गए हैं
ख़ुदा तेरे शहर में
khud ko kar buland itna shayari
ख़ुदी को कर बुलंद इतना
कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे
बता तेरी रज़ा क्या है
khud ko kar buland itna shayari
मैं उस से ये तो नहीं
कह रहा जुदा न करे
मगर वो कर नहीं सकता
तो फिर कहा न करे
कश्तियाँ सब की किनारे
पे पहुँच जाती हैं
नाख़ुदा जिन का नहीं
उन का ख़ुदा होता है
जहाँ से जी न लगे
तुम वहीं बिछड़ जाना
मगर ख़ुदा के लिए
बेवफ़ाई न करना
जानिए उस से निभेगी किस तरह
वो ख़ुदा है मैं तो बंदा भी नहीं
अनोखी वज़्अ है सारे
ज़माने से निराले हैं
ये आशिक़ कौन सी
बस्ती के या-रब रहने वाले हैं
मता-ए-बे-बहा है
दर्द-ओ-सोज़-ए-आरज़ूमंदी
मक़ाम-ए-बंदगी दे कर
न लूँ शान-ए-ख़ुदावंदी
khud ko kar buland itna shayari
जब इश्क़ सिखाता है
आदाब-ए-ख़ुद-आगाही
खुलते हैं ग़ुलामों पर
असरार-ए-शहंशाही
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| Khuda Aur Mohabbat Shayari |
इश्क़ तिरी इंतिहा
इश्क़ मिरी इंतिहा
तू भी अभी ना-तमाम
मैं भी अभी ना-तमाम
ख़ुदी वो बहर है जिस का
कोई किनारा नहीं
तू आबजू इसे समझा
अगर तो चारा नहीं
Khuda Shayari By Ghalib
वो मर्ज़ ए इश्क ही क्या अब्बास
जिस में जलदी शिफ़ा मिले,
कौन मांगे गा खुशियों की दुआ
जिसके दर्द में खुदा मिले
देखा दूंगा औकात किसी रोज
जमाने के खुदाओं को,
बादशाहों की मुकालफत का
मैं बचपन से आदि हूं
Khuda Shayari By Ghalib
ज़बाँ पे बार-ए-ख़ुदाया
ये किस का नाम आया
कि मेरे नुत्क़ ने बोसे
मिरी ज़बाँ के लिए
लोगन ने रोज़ ही नया कुछ मंगा खुदा से,
एक हम हैं तेरे ख्याल से आगे ना गए
ज़िंदगी अपनी जब इस
शक्ल से गुज़री ‘ग़ालिब’
हम भी क्या याद करेंगे
कि ख़ुदा रखते थे
हम ने मोहब्बतों के नशे में
उससे खुदा बनाया डाला,
होश तब आया जब उसने कहा के
खुदा किसी एक का नहीं होता
इश्क़ है तर्ज़ ओ तौर इश्क़ के तईं
कहीं बंदा कहीं ख़ुदा है इश्क़
एक मुद्दत के बाद हम ने ये जाना ऐ खुदा,
एक तेरी ज़ात से इश्क सच्चा,
बाकी सब अफसाने हैं
न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ
न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने
न होता मैं तो क्या होता
Khuda Shayari By Ghalib
वो आए घर में हमारे
ख़ुदा की क़ुदरत है
कभी हम उन को कभी
अपने घर को देखते हैं
चलो उस का नहीं
अल्लाह का एहसान लेते हैं,
वो मिनत से नहीं माना
तो मनते मान लेते हैं
हाँ वो नहीं ख़ुदा-परस्त जाओ
वो बेवफ़ा सही
जिस को हो दीन ओ दिल
अज़ीज़ उस की गली में जाए क्यूँ
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| Khuda Aur Mohabbat Shayari |
क्या वो नमरूद की ख़ुदाई थी
बंदगी में मिरा भला न हुआ
ख़ुदा को काम तो सौंपे हैं
मैं ने सब लेकिन
रहे है ख़ौफ़ मुझे वाँ
की बे-नियाज़ी का
‘मीर’ बंदों से काम कब निकला
माँगना है जो कुछ ख़ुदा से माँग
तुझी पर कुछ ऐ बुत नहीं मुनहसिर
जिसे हम ने पूजा ख़ुदा कर दिया
Khuda Shayari By Ghalib
देखिए लाती है उस शोख़
की नख़वत क्या रंग
उस की हर बात पे हम
नाम-ए-ख़ुदा कहते हैं
सुनते हैं जो बहिश्त की
तारीफ़ सब दुरुस्त
लेकिन ख़ुदा करे
वो तिरा जल्वा-गाह हो
हम हैं मुश्ताक़ और वो बे-ज़ार
या इलाही ये माजरा क्या है
गवाही कैसे टूटती मुआ’
मला ख़ुदा का था
मिरा और उस का राब्ता
तो हाथ और दुआ का था
जब कि तुझ बिन
नहीं कोई मौजूद
फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है
Khuda Shayari By Ghalib
उसे कहा था इश्क ढोंग है
मैं ने कहा
तुझे इश्क हो खुदा करे
कोई तुझ को उसे जुदा करे
तेरे होंट हंसना भूल जाएं
तेरी आंखें पुर-नुम रहा करें
तू उसकी बातें सुना करें
तू उसकी बातें किया करें
तुझे इश्क की वो झरी लगे
तू मिलन की हर पल दुआ करे
तू नगर नगर सदा करे
तू गली गली फिर करे
तुझे इश्क हो फिर यकीन हो
उसी तस्बीह पे परहा करे
फिर मैं कहूं इश्क ढोंग है
तू नहीं नहीं किया कर
ख़ुदी को कर बुलंद इतना
कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता
तेरी रज़ा क्या है
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| Na Tha Kuch To Khuda Tha Shayari |
सादिक़ हूँ अपने क़ौल
का ‘ग़ालिब’ ख़ुदा गवाह
कहता हूँ सच कि झूट
की आदत नहीं मुझे
हया नहीं है ज़माने की
आँख में बाक़ी
ख़ुदा करे कि जवानी
तिरी रहे बे-दाग़
शोरीदगी के हाथ से है
सर वबाल-ए-दोश
सहरा में ऐ ख़ुदा कोई
दीवार भी नहीं
Khuda Shayari By Ghalib
क़यामत है कि होवे मुद्दई का
हम-सफ़र ‘ग़ालिब’
वो काफ़िर जो ख़ुदा को भी
न सौंपा जाए है मुझ से
इस सादगी पे कौन
न मर जाए ऐ ख़ुदा
लड़ते हैं और हाथ में
तलवार भी नहीं
बक रहा हूँ जुनूँ में क्या क्या कुछ
कुछ न समझे ख़ुदा करे कोई
या रब हमें तो ख़्वाब में
भी मत दिखाइयो
ये महशर-ए-ख़याल कि
दुनिया कहें जिसे
Khuda Ki Shayari
उसका दरवाजा रात गए तक
हर ज़ात के आदमी के लिए खुला रहता है
ख़ुदा जाने उसके कमरे सी कुशादगी
मस्ज़िद और मंदिर के आँगनों में कब पैदा होगी?
Khuda Ki Shayari
खुदा को भूल गए लोग फ़िक्र-ए-रोज़ी में
तलाश रिज्क की है राजिक
का ख्याल ही नहीं !!
दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब
क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो
‘ज़फ़र’ आदमी उस को न जानिएगा
वो हो कैसा ही साहब-ए-फ़हम-ओ-ज़का/
जिसे ऐश में याद-ए-ख़ुदा न रही
जिसे तैश में ख़ौफ़-ए-ख़ुदा न रहा
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| khud ko kar buland itna shayari |
कैसी चली है अब के हवा तेरे शहर में
बंदे भी हो गए हैं ख़ुदा तेरे शहर में
कहने को ज़िंदगी थी बहुत मुख़्तसर मगर
कुछ यूँ बसर हुई कि ख़ुदा याद आ गया
अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डुबा के देख
इक तू ही नाख़ुदा नहीं ज़ालिम ख़ुदा भी है
मैं इक थका हुआ इंसान और क्या करता
तरह तरह के तसव्वुर ख़ुदा से बाँध लिए
न मंदिर में सनम होते न मस्जिद में ख़ुदा होता
हमीं से ये तमाशा है न हम होते तो क्या होता
Khuda Ki Shayari
सब लोग अपने अपने ख़ुदाओं
को लाए थे
इक हम ही ऐसे थे कि हमारा
ख़ुदा न था !!
बुत-ख़ाना तोड़ डालिए मस्जिद को ढाइए
दिल को न तोड़िए ये ख़ुदा का मक़ाम है
सब कुछ ख़ुदा से माँग लिया तुझको माँग कर
उठते नहीं हैं हाथ मेरे इस दुआ के बाद
ख़ुदा के नाम पे जिस तरह लोग मर रहे हैं
दुआ करो कि अकेला ख़ुदा न रह जाए
जिन से इंसाँ को पहुँचती है हमेशा तकलीफ़
उन का दावा है कि वो अस्ल ख़ुदा वाले हैं
ना जाने कैसे परखता है मुझे मेरा खुदा
इम्तिहान भी सख्त लेता है ओर मुझे
हारने भी नहीं देता !!
Khuda Ki Shayari
वहाँ भी मुझ को ख़ुदा सर-बुलंद रखता है
जहाँ सरों को झुकाए ज़माना होता है
फ़लक-नशीं सही मेरा ख़ुदा मगर ‘मोहसिन’
कभी कभी वो ज़मीं पर उतर भी आता है
सब्र इतना रखो की इश्क़
बेहूदा ना बने
खुदा मेहबूब बन जाए पर
महबूब खुदा ना बने !!
हर एक दौर का मज़हब नया ख़ुदा लाया
करें तो हम भी मगर किस ख़ुदा की बात करें
हम ख़ुदा के कभी क़ाइल ही न थे
उन को देखा तो ख़ुदा याद आया
इश्क़ है मैं हूँ दिल-ए-नाकाम है
इस के आगे बस ख़ुदा का नाम है
न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता
वही रखेगा मेरे घर को बलाओं से महफूज़
जो शज़र से घोंसला गिरने नहीं देता !!
Khuda Ki Shayari
किसी के तुम हो किसी का ख़ुदा है दुनिया में
मिरे नसीब में तुम भी नहीं ख़ुदा भी नहीं
मोहब्बत कर सकते हो तो खुदा से करो
मिटटी के खिलौनों से कभी
वफ़ा नहीं मिलती !!
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| Khuda Shayari By Ghalib |
फ़रिश्ते हश्र में पूछेंगे पाक-बाज़ों से
गुनाह क्यूँ न किए क्या
ख़ुदा ग़फ़ूर न था !!
उसने महबूब ही तो बदला है
फिर ताज्जुब कैसा
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा
तक बदल देते हैं !!
न कर किसी पे भरोसा कि कश्तियाँ डूबें
ख़ुदा के होते हुए नाख़ुदा के होते हुए
वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है
कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं
बड़ी कशमकश है ए खुदा
थोड़ी रहमत कर दे
या तो ख्वाब ना दिखा
या मुकम्मल कर दे !!
ख़ुदा का घर भी है दिल में बुतों की चाह भी है
सनम-कदा भी है दिल अपना ख़ानक़ाह भी है
Khuda Ki Shayari
एक मुद्दत के बाद हमने ये
जाना ऐ खुदा
इश्क तेरी ज़ात से सच्चा है
बाकी सब अफ़साने !!
आंसू वो खामोश दुआ है
जो सिर्फ खुदा ही सुन
सकता है !!
रक़ीबों ने रपट लिखवाई है जा जा के थाने में
कि ‘अकबर’ नाम लेता है ख़ुदा का इस ज़माने में
आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता
ना जहां मांगा है ना आसमां
मांगा है तुझसे ए खुदा मैंने तो
मेरे हिस्से में बस उसे ही मांगा है !!
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| Khuda Ki Shayari |
अल्फ़ाज़ों में क्या बयां करें अपनी
मोहब्बत के अफ़साने
हमारे में तो तुम ही हो तुम्हारे
दिल की खुदा जाने !!
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